मॉस्को। भारत और रूस की दोस्ती लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक मिसाल रही है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी दबावों के बावजूद, रूस ने BRICS समूह में भारत की अध्यक्षता के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताई है। रूस का कहना है कि, भारत का एजेंडा आधुनिक, व्यावहारिक और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए बेहद प्रासंगिक है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सोमवार को इंटरव्यू में कहा कि, भारत की BRICS अध्यक्षता वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद, ऊर्जा सुरक्षा और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर भारत का एजेंडा पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद है।
लावरोव ने कहा कि, भारत का आतंकवाद विरोधी रुख विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान और भारत-पाक-अफगान गलियारे में लगातार आतंकवादी गतिविधियों के बीच भारत और रूस संयुक्त राष्ट्र में मिलकर वैश्विक आतंकवाद विरोधी पहल को आगे बढ़ा रहे हैं।
रूस ने भारत की प्राथमिकता को स्वीकार किया कि, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाए। लावरोव ने बताया कि, वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा के लिए भारत के कदम व्यावहारिक और प्रभावी होंगे। रूस ने यह भी कहा कि AI और ICT (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) पर भारत का फोकस सही दिशा में है और रूस इस एजेंडे में सक्रिय योगदान देगा।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल व्यापार बंद करने का दबाव डाला। हालांकि, रूस ने साफ कर दिया कि वह भारतीय पहल का समर्थन करता रहेगा। लावरोव ने कहा कि, रूस अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल करने से इंकार नहीं कर रहा है, लेकिन भारत के साथ रणनीतिक सहयोग जारी रहेगा।
रूस के डिप्टी विदेश मंत्री और BRICS शेरपा सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि, भारत की नेतृत्व क्षमता और एजेंडा बेहद संतुलित और वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी है। उन्होंने भारत की संस्कृति, मानवता और तकनीकी नवाचार की तारीफ की और भरोसा जताया कि भारत की अगुवाई में BRICS नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
BRICS समूह की स्थापना 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन (BRIC) के रूप में हुई थी। 2011 में दक्षिण अफ्रीका शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS पड़ा। अब इसमें 10 नए सदस्य और पार्टनर देशों को जोड़ा जा चुका है।
लावरोव ने कहा कि, BRICS का दरवाजा नए सदस्यों के लिए खुला है। इंडोनेशिया, बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, वियतनाम, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर देश का दर्जा दिया गया है। भारत की अध्यक्षता के तहत समूह विस्तार और सहयोग को और मजबूत करेगा।
भारत और रूस का आतंकवाद विरोधी सहयोग भी BRICS समिट में प्रमुख एजेंडा रहेगा। लावरोव ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए भारत और रूस संयुक्त रूप से वैश्विक सम्मेलन और समझौतों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मसौदा तैयार हो चुका है और अब इसे देशों की सहमति के साथ लागू किया जाएगा।
भारत AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस को भी आमंत्रित किया गया है। लावरोव ने कहा कि, रूस तकनीकी एजेंडे में सक्रिय योगदान देगा। इसके अलावा ICT सुरक्षा और डिजिटल नवाचार पर दोनों देश सहयोग बढ़ाएंगे।