एन. चंद्रशेखरन का Tata Sons के चेयरमैन पद से इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी; नोएल टाटा से मतभेद की चर्चा

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनका कार्यकाल तुरंत खत्म नहीं होगा। वह फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। इसके बाद वह अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं मांगेंगे। उनका यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली Tata Sons की AGM से ठीक पहले आया है। चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब Tata Sons के नेतृत्व को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद थे।
नोएल टाटा से मतभेद के बीच आया फैसला
चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने को लेकर Tata Trusts के भीतर सहमति नहीं बन पाई थी। रिपोर्टों के अनुसार, नए कारोबार में बड़े निवेश और उनके प्रदर्शन को लेकर नोएल टाटा समेत कुछ ट्रस्टियों की चिंताएं थीं। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में Tata Group ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और एविएशन जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। Air India का अधिग्रहण भी इसी दौर में हुआ। हालांकि, इन नए कारोबारों में भारी पूंजी लगाने को लेकर समूह के भीतर सवाल उठते रहे। 18 अगस्त की AGM में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर वोटिंग होनी थी। ऐसे में उनके इस्तीफे ने Tata Group के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों को खत्म कर दिया है।
रतन टाटा के निधन के बाद बढ़ी खींचतान
रतन टाटा के निधन के बाद Tata Trusts के भीतर मतभेद और ज्यादा चर्चा में आए। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े कुछ सदस्यों के बीच मतभेद सामने आए और कुछ ट्रस्टियों ने अपने पद भी छोड़े। इस दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की ओर से भी ट्रस्टियों को सलाह दिए जाने की खबरें आईं कि उनके आपसी मतभेदों का असर Tata Group की कंपनियों के कामकाज पर नहीं पड़ना चाहिए। अंदरूनी खींचतान की वजह से कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में देरी को लेकर भी चिंता जताई गई थी।
चंद्रशेखरन के 9 साल में कितना बदला Tata Group?
एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons की कमान संभाली थी। वह Tata परिवार से बाहर के पहले पेशेवर मैनेजर थे, जिन्हें समूह का चेयरमैन बनाया गया। उनके कार्यकाल में Tata Group का कारोबार तेजी से बढ़ा। वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू करीब ₹7.89 लाख करोड़ था, जो FY2026 में बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में ग्रुप का शुद्ध मुनाफा करीब ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया। लिस्टेड Tata कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी FY2020 के करीब ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर FY2026 में ₹24.39 लाख करोड़ हो गया।
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अब नए नेतृत्व की चुनौती
चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे वक्त आया है, जब Tata Group कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। इनमें सेमीकंडक्टर फैब, EV बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और Air India के विलय जैसे बड़े फैसले शामिल हैं। चंद्रशेखरन Tata Sons के अलावा TCS, Tata Motors और Tata Consumer Products जैसी प्रमुख कंपनियों के चेयरमैन भी हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद सिर्फ Tata Sons ही नहीं, बल्कि पूरे समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि Tata Group की कमान आगे किसके हाथों में जाएगी और नए नेतृत्व की रणनीति क्या होगी।












