
भोपाल| मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को खुशीलाल आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में आयोजित आयुर्वेद पर्व-2025 में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय सेमिनार और आरोग्य मेले का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने स्मारिका (सुविनियर) का विमोचन किया, आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैद्यों का सम्मान किया और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित व्याख्याताओं को नियुक्ति पत्र सौंपे।
कई मुख्य अतिथि हुए शामिल
इस अवसर पर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, विधायक भगवानदास सबनानी और अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन ट्रस्ट, नई दिल्ली के अध्यक्ष पद्मश्री एवं पद्मभूषण वैद्य देवेन्द्र त्रिगुणा विशेष रूप से मौजूद रहे।
मोहन यादव द्वारा बोली गई अहम बातें
कार्यक्रम में सीएम ने कहा, ‘लोग अक्सर यह कहते हैं कि आयुर्वेद की दवाइयां धीरे असर करती हैं, लेकिन मेरी व्यक्तिगत अनुभव से आयुर्वेद ने तेजी से असर किया, क्योंकि मैं शिक्षा मंत्री से मुख्यमंत्री बन गया।’
- मध्य प्रदेश की धरती पर 2028 में महाकुंभ का आयोजन
उन्होंने आगे कहा, ‘मध्य प्रदेश की धरती पर 2028 में महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है। हमारी आस्था और विश्वास रखने वाले लोग बड़े उत्साह से इस महापर्व का इंतजार करेंगे।’ इसके साथ ही, सीएम ने 2028 के कुंभ में आयुर्वेद पर्व का आयोजन करने की बात भी कही।
- आयुर्वेद के ब्रांड एंबेसडर हैं पीएम मोदी
सीएम यादव ने कहा, ‘आयुर्वेद एक हजारों साल पुरानी परंपरा है। आज जब दुनिया इस ओर आकर्षित हो रही है, तो हम इस के राजदूत की भूमिका निभा रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री तो इसके ब्रांड एंबेसडर हैं। वे भारत से बाहर जाकर भी हर मोर्चे पर आयुर्वेद को प्रमोट करते हैं।’
- आयुर्वेद में काम करने वाले संस्थानों को देंगे उज्जैन में जमीन
सीएम ने कहा कि ‘भारत में ऐसी अनमोल धरोहरें हैं, जिन्हें समझने की दुनिया की जिज्ञासा बढ़ रही है, और इस पर हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।’ उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने का संकल्प लिया है, जिससे राज्य में मेडिकल कॉलेज की संख्या 67 हो जाएगी। इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति 2020 के तहत आयुर्वेद से संबंधित संस्थाओं को उज्जैन में भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
आयुर्वेद को समझने के लिए पहले भारत को समझना होगा- कैबिनेट मंत्री
कैबिनेट मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ‘आयुर्वेद को समझने के लिए पहले भारत को समझना होगा, और इसे फिर से दुनिया के सामने लाने का काम किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के गौरव को बहाल करने के लिए यह महासम्मेलन भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आयुर्वेद में रिसर्च की आवश्यकता है, और इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। पतंजलि, एम्स भोपाल और मैनिट के साथ शोध कार्य के अलावा, सिकल सेल पर भी शोध हो रहा है, और ई-लाइब्रेरी बनाने का काम भी जारी है।
कलियासोत मैदान में विभिन्न प्रोग्राम आयोजित
आयुर्वेद पर्व के दौरान कलियासोत मैदान में विभिन्न प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे। इसमें साइंस एक्सहिबिशन, आयुर्वेदिक उत्पादों और औषधियों का प्रदर्शन, जड़ी-बूटियों की जानकारी, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, और राष्ट्रीय संगोष्ठी शामिल हैं।
कार्यक्रम में देशभर के कई आयुर्वेद विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। साथ ही, आयुर्वेद के 190 से अधिक स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे और अपने रिसर्च पेपर का प्रेजेंटेशन देंगे।
One Comment