
हर्षित चौरसिया-जबलपुर। भारत में तेजी से डायबिटीज की बीमारी की चपेट में आ रहे बच्चों को इंसुलिन से राहत दिलाने के लिए जल्द ही बाजार में इन्हेलर को उतारा जाएगा। यह जानकारी होटल गुलजार में आयोजित डायबिटीज की नेशनल कॉन्फ्रेंस में जबलपुर प्रवास पर आए हैदराबाद के डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. फराज फरिश्ता ने पीपुल्स समाचार को दिए साक्षात्कार में दी। उन्होंने चर्चा में बताया कि उनके एफएस एंड्रोक्राइन सेंटर ने अमेरिका की एक कंपनी के साथ इस पर रिसर्च करके रिपोर्ट दे दी है।
उन्होंने बताया कि इस रिसर्च को लेकर सभी स्टडी पूरी कर सरकार को रिसर्च भेज दी गई है। संभवत: 2025 जनवरी तक यह बच्चों के लिए मार्केट में आ जाएगा। यह इंसुलिन से इसलिए बेहतर है, क्योंकि उसमें सुई का प्रयोग नहीं होगा। यह अस्थमा के इन्हेलर की तरह काम करेगा। डॉ. फराज ने बताया कि भारत के करीब 2 लाख बच्चे टाइप – 1 डायबिटीज की बीमारी से ग्रसित हैं। कोविड के बाद से 12 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज डायग्नोस की जा रही है।
मप्र में 5 हजार बच्चे पीड़ित
इंदौर से आए विशेषज्ञ डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में करीब 5 हजार बच्चे टाइप – 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं। अब यह बीमारी गरीब बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है, जिस पर रोकथाम के लिए व्यापक तौर पर अभियान चलाने की आवश्यकता है।
बच्चों में डायबिटीज कंट्रोल करने इंसुलिन सबसे बेहतर उपाय
विशेषज्ञों ने बताया कि वतर्मान में टाइप-1 डायबिटीज वाले बच्चों को शुगर लेवल सामान्य रखने के लिए इंसुलिन ही सबसे बेहतर तरीका है। चिकित्सक पीड़ित की स्थिति को देखते हुए उसे इंसुलिन या तो इंजेक्शन द्वारा या इंसुलिन पंप द्वारा देते हैं।
बच्चों में टाइप 1 मधुमेह क्या है?
डॉक्टरों ने बताया मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है या सामान्य रूप से इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता है। टाइप 1 मधुमेह एक स्वप्रतिरक्षी विकार है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। जब ग्लूकोज कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता, तो यह रक्त में जमा हो जाता है। इसे उच्च रक्त शर्करा (हाइपरग्लेसेमिया) कहा जाता है। उच्च रक्त शर्करा पूरे शरीर में समस्याएं पैदा कर सकता है।
मुख्य बातें
टाइप 1 मधुमेह मेलिटस एक दीघर्कालिक (पुरानी) स्थिति है जिसमें रक्त शर्करा का स्तर असामान्य रूप से उच्च होता है। इसकी शुरूआत किसी भी उम्र में हो सकती है।
- यह अक्सर ऑटोइम्यून विकार के कारण होता है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है।
- टाइप 1 मधुमेह वाले बच्चों को रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य सीमा के भीतर रखने के लिए दैनिक इंसुलिन शॉट्स लेने चाहिए।
- इंसुलिन के बिना, रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता रहेगा और मृत्यु होगी।
- दैनिक इंसुलिन इंजेक्शन और अन्य प्रबंधन गतिविधियों के साथ, टाइप 1 मधुमेह वाले बच्चे सक्रिय, स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।