बिजनेस डेस्क। भारत के प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप्स में शामिल एथर एनर्जी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरुण मेहता ने हाल ही में अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की है। आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र तरुण मेहता ने बताया कि हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के इंटरव्यू में असफल होने के बाद उन्होंने पारंपरिक करियर का रास्ता छोड़कर खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। आज उनकी कंपनी की वैल्यू करीब 26,800 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। उन्होंने यह अनुभव बेस्ट प्लेसेज़ टू बिल्ड पॉडकास्ट में साझा किया।
तरुण मेहता ने IIT Madras से पढ़ाई की। वर्ष 2012 में अंतिम वर्ष के दौरान वे अपने भविष्य को लेकर असमंजस में थे। उस समय उनके सामने नौकरी करने, अमेरिका जाकर उच्च शिक्षा लेने या एमबीए करने जैसे विकल्प थे। आईआईटी के कई सीनियर बेहतर करियर के लिए कंसल्टिंग या विदेश में पढ़ाई का रास्ता चुन रहे थे, इसलिए उन्हें एमबीए एक व्यावहारिक विकल्प लगा।
तरुण मेहता ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के 2+2 कार्यक्रम के लिए आवेदन किया और उन्हें इंटरव्यू के लिए चुना गया। वे बोस्टन जाकर इंटरव्यू में शामिल हुए, लेकिन इंटरव्यू उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि वे इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे। इस इंटरव्यू के लिए उनके माता-पिता ने यात्रा पर काफी खर्च किया था, जिससे असफलता का असर उन पर गहरा पड़ा। उन्हें लगा कि उन्होंने अपने माता-पिता का पैसा खर्च कर दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली और उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी तय नहीं था।
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हार्वर्ड में प्रवेश नहीं मिलने के बाद तरुण मेहता को दूसरी निराशा तब मिली, जब उन्हें अपनी पसंद की कंपनियों में नौकरी नहीं मिल सकी। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें मैकिन्ज़ी एंड कंपनी या आईटीसी में अवसर मिलेगा, लेकिन उन्हें इंटरव्यू का मौका भी नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने चेन्नई में अशोक लेलैंड में नौकरी शुरू की। इसी दौरान उनके मित्र स्वप्निल जैन बेंगलुरु में कार्यरत थे।
नौकरी के साथ-साथ तरुण मेहता और स्वप्निल जैन नए विचारों पर काम करते रहे। आईआईटी के अंतिम वर्ष में ही उन्होंने कई पेटेंट दाखिल किए थे, जिनमें बदलने योग्य बैटरी पैक से जुड़ा विचार भी शामिल था। समय मिलने पर तरुण मेहता ने इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में गहराई से अध्ययन शुरू किया। उन्होंने बैटरी तकनीक को समझा, एक इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा और उपयोगकर्ताओं से बातचीत कर उनके अनुभव जाने।
फरवरी 2013 में स्वप्निल जैन ने नौकरी छोड़कर चेन्नई आकर इस विचार पर पूरा समय देने का निर्णय लिया। यह कदम तरुण मेहता के लिए भी प्रेरणा बना और उन्होंने भी नौकरी छोड़ दी। उस समय उनकी मासिक आय लगभग 40 से 42 हजार रुपए थी और उनके ऊपर अधिक आर्थिक जिम्मेदारियां नहीं थीं, इसलिए जोखिम सीमित था। दोनों ने आईआईटी मद्रास की प्रयोगशाला से अपने प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर अपने विचारों को विकसित किया।
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इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर प्रदर्शन और भारतीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य धीरे-धीरे एक बड़े विजन में बदल गया। इसी के साथ एथर एनर्जी की शुरुआत हुई। वर्ष 2018 में कंपनी ने भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री शुरू की और धीरे-धीरे यह देश के प्रमुख ईवी स्टार्टअप्स में शामिल हो गई। वर्ष 2025 में कंपनी के आईपीओ के समय इसकी वैल्यू करीब 1.4 अरब डॉलर आंकी गई थी।
एक दशक से अधिक समय में एथर एनर्जी ने तेज वृद्धि हासिल की है। वर्तमान में कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 26,800 करोड़ रुपए बताया जाता है। तरुण मेहता की यह यात्रा दिखाती है कि असफलता भी सफलता की राह खोल सकती है।