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कोई बना पेपा पिग, तो किसी ने अपना लिया मोटू-पतलू को

मोबाइल में लगातार कार्टून देखने से बच्चों में बढ़ रहा वर्चुअल ऑटिज्म, प्रतिदिन आ रहे 70-80 केस
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कोई बना पेपा पिग, तो किसी ने अपना लिया मोटू-पतलू को

प्रभा उपाध्याय-इंदौर। आप भी अपने बच्चों को स्मार्टफोन दे रहे हैं तो संभल जाएं नहीं तो आपका बच्चा भी किसी न किसी कार्टून कैरेक्टर में इतना उतर जाएगा कि उसके हाव- भाव व बोल-चाल वैसे ही हो जाएंगे। दरअसल ये बच्चे वर्चुअल ऑटिज्म से पीड़ित हो रहे हैं। कोई पेपा पिग, डोरेमोन तो कोई मोटू- पतलू के कैरेक्टर में उतर गया है। इंदौर एमवायएच में ऐसे प्रतिदिन 70 से 80 केस आ रहे हैं।

बचने के उपाय :- विशेषज्ञ डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों में यह लक्षण दिखते हैं तो तुरंत इलाज कराएं। समय रहते 2से 3 साल में बच्चा सामाजिक व्यवहार में आ जाता है। यदि सीवियर हो जाता है तो सामान्य स्थिति में लाना मुश्किल होता है। बच्चों को समय दें, उनके साथ स्केच और ड्राइंग बनाएं या माइंड गेम खेलें।

बच्चों में दिख रहे ये लक्षण

  • बोलते वक्त हिचकिचाना या हकलाना।
  • घर के अलावा अन्य लोगों से बात न करना।
  • किसी भी चीज की सोचने और समझने की क्षमता धीमी होना।
  • कार्टून या अन्य कैरेक्टर को सही समझना।
  • कोई चीज न देने पर देर तक आक्रामक व्यवहार करना
  • हाइपर एक्टिव होना, चिड़चिड़ाहट और सामान फेंकना।

केस 1

ढाई साल के चित्रांश की मां दीपिका ने बताया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती। घर के काम करते समय मोबाइल दे देती थी। चित्रांश मोटू- पतलू कार्टून देखता था तो वह उसी की तरह बात करने लगा। उसका स्वभाव वैसा ही हो गया। हमने डॉक्टर को बताया और ट्रीटमेंट शुरू किया है। 8 माह से इलाज चल रहा है।

केस 2

वर्न (7 साल) की मां दीपिका ने बताया कि सिंगल फैमिली के कारण काम के समय मोबाइल देती थी। वर्न पेपा पिग बहुत देखता था। धीरे-धीरे उसके बर्ताव जो कार्टून देखता था, वैसा ही होने लगा, वह हमें बोलता, पापा-पिग, मम्मी पिग। हमने तुरंत डॉक्टर को दिखाया। अब उसका ट्रीटमेंट एमवाय में चल रहा है।

माता-पिता दोनों ही नौकरी करते हैं तो वे बच्चों पर ध्यान नहीं देते। अपने काम के लिए माता-पिता बच्चों को मोबाइल दे देते हैं। इससे वह कार्टून में लगकर चुप बैठ जाता है। बच्चा लगातार 2 से 3 घंटे एक ही तरह का कार्टून रोज देखता है और वह जो सुनता है, वही सीखता है। इसलिए बच्चे ऐसा करते हैं। -गौतम सुरागे, विभागाध्यक्ष, ऑक्युपेशन थैरेपी, एमवायएच, इंदौर

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