सोहागपुर में मंगलम गरबा महोत्सव 3.0 का शुभारंभ, गुजराती-पंजाबी गानों पर झूमे युवा और महिलाएं
सोहागपुर। नवरात्रि के अवसर पर सोहागपुर के वाटिका गार्डन में गुरुवार को दो दिवसीय ‘मंगलम गरबा महोत्सव 3.0’ का शुभारंभ हुआ। द ड्रीम टीम की ओर से लगातार तीसरे वर्ष आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन युवाओं, कपल्स और महिलाओं ने उत्साह के साथ गरबा किया। गुजराती, पंजाबी और राजस्थानी गीतों की धुन पर प्रतिभागियों ने पारंपरिक अंदाज में नृत्य प्रस्तुतियां दीं। आयोजन स्थल पर भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। गरबा देखने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी भी पहुंचे।
पारंपरिक नृत्य और वेशभूषा ने बढ़ाई महोत्सव की रौनक
महोत्सव के दौरान प्रतिभागी अपने-अपने सर्किल में तालमेल के साथ गरबा करते नजर आए। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां आयोजन का आकर्षण रहीं। युवाओं, महिलाओं और परिवारों की भागीदारी से कार्यक्रम में उत्सवी माहौल बना रहा। गरबा नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और आदिशक्ति की आराधना से जुड़ी लोकपरंपरा है। गुजरात की संस्कृति से जुड़ा यह नृत्य अब देश-विदेश में लोकप्रिय है। गरबा का गोलाकार स्वरूप सामूहिक एकता और जीवनचक्र का प्रतीक माना जाता है। सोहागपुर में आयोजित यह महोत्सव भी लोगों को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर दे रहा है।
निःशुल्क कार्यशाला में सिखाए गरबा के स्टेप्स
द ड्रीम टीम की ओर से महोत्सव की तैयारियों के लिए पिछले कई दिनों से निःशुल्क गरबा अभ्यास कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें नृत्य प्रशिक्षक सुहानी चौधरी ने किशोरियों और महिलाओं को गरबा के स्टेप्स, मुद्राओं, तालमेल और सामूहिक नृत्य का अभ्यास कराया। प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों ने महोत्सव के पहले दिन आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
शुभारंभ में शामिल हुए गणमान्य नागरिक
मंगलम गरबा महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी कन्नू लाल अग्रवाल, चौधरी राजेंद्र सिंह, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष संतोष मालवीय, पंडित प्रकाश मुद्गल, पूर्व प्राचार्य श्रीमती तारा जायसवाल, नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रशांत जायसवाल, समाजसेवी जलज शर्मा, मनोज अग्रवाल, गौरव पुरबिया और अभिषेक चौहान सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। दो दिवसीय मंगलम गरबा महोत्सव के पहले दिन की प्रस्तुतियों ने सोहागपुर में नवरात्रि के उत्साह को और बढ़ा दिया। आयोजन के जरिए लोगों को गरबा के माध्यम से धार्मिक आस्था व्यक्त करने और भारतीय लोकसंस्कृति से जुड़ने का अवसर मिला।
























