इंडोनेशिया में जंगल की आग से दक्षिण-पूर्व एशिया में हाहाकार, सांस की बीमारियां बढ़ीं, सिंगापुर-मलेशिया में खतरनाक धुंध, 9 लाख हेक्टेयर जलकर खाक

जकार्ता/सिंगापुर। इंडोनेशिया में लंबे समय से चल रही जंगलों की आग के कारण सांस संबंधी बीमारियों में भारी वृद्धि हुई है और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में खतरनाक धुंध फैल गई है। पिछले एक हफ्ते में सिंगापुर और मलेशिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बढ़ते प्रदूषण ने क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने आग पर जकार्ता की प्रतिक्रिया और पड़ोसी देशों से मदद लेने में उसकी हिचकिचाहट को लेकर चिंता जताई है।
इस धुंध का कारण क्या है
यह धुंध मुख्य रूप से इंडोनेशिया के जंगलों और पीटलैंड (peatland- एक विशेष प्रकार का स्थलीय आर्द्रभूमि (Wetland) पारिस्थितिकी तंत्र है) में लगी आग से निकलने वाले धुएं और उत्सर्जन के कारण है, खासकर बोर्नियो और सुमात्रा में। इन द्वीपों पर घने जंगल और पीट-भूमि के बड़े इलाके हैं। यह सूखे के मौसम (आमतौर पर अप्रैल से अक्टूबर तक) में आग की चपेट में बहुत आसानी से आ जाते हैं। इस क्षेत्र में गंभीर सुपर अल नीनो (super El Niño) स्थितियों का असर भी देखा जा रहा है, जिससे गर्मी और सूखा बढ़ गया है। इससे आग और भी तेजी से फैल रही है। इंडोनेशिया में इससे पहले 2015 में इतनी भीषण आग लगी थी, तब इसी तरह की गंभीर अल नीनो स्थितियों के कारण बड़े पैमाने पर आग फैल गई थी।
इस आग से कितना नुकसान हुआ
आग से प्रभावित क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़े जुलाई के बाद से अपडेट नहीं किए गए हैं। उस समय तक लगभग 202,000 हेक्टेयर (करीब 500,000 एकड़) इलाका जल चुका था। हालांकि, पर्यावरण संगठन 'ऑरिगा' (Auriga) का अनुमान है कि इस साल जनवरी से अगस्त के बीच 637,000 हेक्टेयर से ज़्यादा इलाका प्रभावित हुआ है। यह क्षेत्रफल लगभग सिंगापुर के आकार से नौ गुना बड़ा है। वनों की कटाई पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म 'नुसंतारा एटलस' (Nusantara Atlas) ने इससे भी ज्यादा बड़ा अनुमान दिया है, जिसके अनुसार प्रभावित इलाका लगभग 900,000 हेक्टेयर है।
धुंध (haze) कितनी गंभीर है
यूरोपीय संघ की 'कोपरनिकस क्लाइमेट मॉनिटरिंग सर्विस' द्वारा विकसित प्लेटफॉर्म 'फायर एमिशन वॉच' (fire emissions watch) के आंकड़ों से पता चलता है कि इंडोनेशिया में एक महीने के दौरान दुनिया में सबसे ज़्यादा 'फायर एमिशन' (आग से होने वाला उत्सर्जन) दर्ज किया गया। पिछले सात दिनों में दुनिया भर में आग से होने वाले कुल उत्सर्जन का लगभग आधा हिस्सा इसी देश से आया। इंडोनेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा के कुछ हिस्सों में वायु प्रदूषण सूचकांक (air pollution index) 1,000 के पार पहुंच गया। गौरतलब है कि 300 या उससे ज़्यादा का प्रदूषण स्तर पहले से ही खतरनाक (hazardous) माना जाता है। आग के चलते सिंगापुर में भी हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो गई है। बुधवार को, द्वीप के पश्चिमी हिस्से में एक घंटे का PM2.5 स्तर 284 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। यह इस साल पहली बार राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी की बहुत अधिक (very high) श्रेणी में आ गया है। इसका स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
लोगों में बढ़ रही सांस की बीमारियां
इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 13 अक्टूबर तक सात प्रांतों में आग से जुड़ी सांस की बीमारियों के मामले बढ़कर 283,270 हो गए। यह 9 सितंबर को दर्ज किए गए 113,336 मामलों से दोगुने से भी ज्यादा है।इस धुंध ने रोजमर्रा की जिंदगी और परिवहन व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। इंडोनेशिया, पड़ोसी देश पूर्वी तिमोर और मलेशिया के कई राज्यों में कई स्कूलों को बंद करना पड़ा है। इंडोनेशिया में, 11 अगस्त से 12 अक्टूबर के बीच लगभग 2,000 उड़ानें प्रभावित हुईं।
इंडोनेशिया आग पर काबू पाने के लिए क्या कदम उठा रहा है
इंडोनेशियाई सरकार का कहना है कि वह आग को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। आग बुझाने के काम में 60,000 से ज्यादा कर्मियों को तैनात किया गया है। लगभग 50 विमानों को पानी की बौछार करने (वाटर-बॉम्बिंग) और क्लाउड-सीडिंग (कृत्रिम बारिश) के कामों में लगाया गया है। जकार्ता आग से बचाव को मजबूत करने के लिए और अधिक वन रक्षकों (फॉरेस्ट रेंजर्स) को भर्ती करने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही उसने यहां के पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से बहाल करने का वादा किया है।
कम तापमान पर भी सुलगती रहती है यहां आग
पीटलैंड की आग को बुझाना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि यह कम तापमान पर भी जमीन के नीचे लंबे समय तक सुलगती रह सकती है। सरकार ने यह भी कहा है कि वह नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यवसायों और लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इसमें कृषि भूमि को साफ करने के लिए आग के इस्तेमाल पर लगी पाबंदियों का उल्लंघन करने वाले लोग भी शामिल हैं।पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जंगलों में आग लगाने में शामिल होने के कारण 223 लोगों और नौ कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
आग और धुंध कब तक बनी रह सकती हैं
इंडोनेशियाई अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस इलाके में लगातार बारिश नहीं होती, तब तक हालात काबू में आने की संभावना कम है। इस साल सूखा मौसम सामान्य से जल्दी शुरू हो गया और उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा खिंच गया है। आमतौर पर बारिश अक्टूबर में शुरू हो जाती है, लेकिन मौसम के पूर्वानुमान बताते हैं कि इस बार बारिश का मौसम नवंबर तक टल सकता है। इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी का कहना है कि अल नीनो का असर 2027 की पहली तिमाही तक बना रह सकता है। हालांकि, उम्मीद है कि मौसमी बारिश शुरू होने से आग की तीव्रता कम होगी और इसका दायरा भी सीमित हो जाएगा।




















