वडोदरा। कांग्रेस नेता और संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार को वडोदरा दौरे पर रहे हैं। वे यहां आयोजित ‘आदिवासी अधिकार संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए, राहुल ने अपने भाषण में केंद्र सरकार और PM नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ उन्होंने पश्चिम एशिया संकट, अमेरिका-भारत संबंध, अडाणी समूह और आदिवासी अधिकारों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा में 25 मिनट का भाषण दिया, लेकिन अमेरिका के खिलाफ एक शब्द नहीं बोले। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी पूरी तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनालंड ट्रंप के 100 % कंट्रोल में हैं इस कारण वे संसद में खुलकर बहस नहीं कर सकते।
राहुल ने कहा कि ट्रंप बार-बार दावा करते हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया, जो भारतीय सेना का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के सामने कुछ बोल नहीं पाते और उन पर बाहरी दबाव है। यहीं कारण है कि भारत अमेरिका ताकत के आगे झुका है और खुलकर फैसले नहीं कर पाता है।
आगे राहुल ने गौतम अडाणी का जिक्र करते हुए कहा कि देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर- जैसे पोर्ट, एयरपोर्ट, ऊर्जा और सीमेंट एक ही समूह को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े कॉरपोरेट ढांचे में आदिवासियों की भागीदारी न के बराबर है। जो कि आदिवासियों के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ट्रेड डील के जरिए भारत के कृषि बाजार को अमेरिका के लिए खोल दिया है। राहुल के मुताबिक, छोटे भारतीय किसानों को बड़े अमेरिकी फार्म्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिससे दाल, सोयाबीन, कपास और फल उत्पादकों को नुकसान हो सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी इस देश के “असल मालिक” हैं और ‘जल, जंगल, जमीन’ पर उनका हक है। उन्होंने RSS-BJP पर ‘वनवासी’ शब्द इस्तेमाल कर आदिवासियों की पहचान बदलने का आरोप लगाया और कहा कि विकास के नाम पर सबसे ज्यादा नुकसान इसी वर्ग को उठाना पड़ता है।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर हो रही है और इसका असर किसानों, आदिवासियों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है।राहुल ने यह भी कहा कि मनरेगा जैसी योजनाएं गरीबों और ग्रामीणों को सुरक्षा देने के लिए बनाई गई थीं, लेकिन वर्तमान नीतियों से उनका प्रभाव कम हो रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में विदेश नीति, ऊर्जा संकट और आर्थिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
गुजरात में इसी महीने निकाय चुनावों का ऐलान हो सकता है। नगर निगम और जिला पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। जानकारी के मुताबिक, राज्य विधानसभा का सत्र 25 मार्च को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद गुजरात राज्य निर्वाचन आयोग 26 मार्च को स्थानीय निकाय चुनावों का शेड्यूल जारी कर सकता है।
संभावना है कि चुनाव आयोग तारीखों के साथ आचार संहिता लागू करने का भी ऐलान करेगा, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी। निकाय चुनावों को लेकर सभी प्रमुख दल पहले से ही सक्रिय हैं और जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर चुके हैं।