नई दिल्ली। हाल ही में एक संसद की सीढ़ियों पर बैठे विपक्ष के नेताओं तस्वीर ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी संसद की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट लेते नजर आए, जिसके बाद यह मुद्दा विवाद का कारण बन गया। इस घटना को लेकर पूर्व सैनिकों और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह व्यवहार संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग भी तेज हो गई है।
पूर्व सैनिकों द्वारा जारी एक पत्र में संसद की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि यह देश के संवैधानिक ढांचे का सर्वोच्च प्रतीक है। पत्र में स्पष्ट किया गया कि संसद केवल एक इमारत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र है। लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों के साथ-साथ परिसर के हर हिस्से चाहे वह सीढ़ियां हों, गलियारे या लॉबी, सभी पर समान रूप से मर्यादा लागू होती है। ऐसे में किसी भी तरह का अनौपचारिक या असंगत व्यवहार संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है।
पत्र में 12 मार्च की घटना का जिक्र करते हुए कहा गया है कि संसद परिसर में प्रदर्शन और विरोध पर पहले से प्रतिबंध है, इसके बावजूद विपक्ष ने नियमों की अनदेखी की। आरोप है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों ने न केवल इन निर्देशों का उल्लंघन किया, बल्कि संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट का सेवन कर इसे एक राजनीतिक प्रदर्शन का रूप दे दिया। इसे संसदीय अधिकारों की अवहेलना और संस्थागत मर्यादा के खिलाफ बताया गया है।
पूर्व सैनिकों ने अपने पत्र में साफ कहा है कि संसद की सीढ़ियां किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन या तमाशे का मंच नहीं हो सकतीं। उनका मानना है कि इस तरह के व्यवहार से सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार और संवाद का स्तर प्रभावित होता है। उन्होंने राहुल गांधी से देश से माफी मांगने और अपने आचरण पर आत्ममंथन करने की अपील की है, ताकि संसद की गरिमा और उसकी संस्थागत पवित्रता को भविष्य में अक्षुण्ण रखा जा सके।