
राजनीति में दल बदल का मुद्या एक बार फिर गरमा गया है। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राघव चड्ढा को लेकर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस कदम को सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि भरोसे के साथ गद्दारी बताया है। डिंपल यादव ने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को आगे बढ़ाया, उसी को छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना 'राष्ट्रद्रोह के बराबर' है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सपा सांसद डिंपल यादव ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भरोसे पर राज्यसभा पहुंचने के बाद उसे छोड़ देना गलत है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी की वजह से आप सांसद बने, उसी को छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना गद्दारी है। यह कदम राष्ट्रद्रोह के बराबर है। डिंपल ने यह भी कहा कि राजनीति में विचारधारा और भरोसा सबसे जरूरी होता है, लेकिन इस तरह के फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करते हैं।
डिंपल यादव ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव में बड़ा फर्क होता है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सांसद सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा सांसदों को पार्टियां नामित करती हैं और वे विधानसभा के जरिए चुने जाते हैं। ऐसे में पार्टी छोड़ना सीधे-सीधे उस भरोसे को तोड़ना है, जो पार्टी नेतृत्व ने दिखाया था। उनके मुताबिक, 'आप जनता के वोट से नहीं, बल्कि पार्टी के भरोसे से संसद पहुंचे थे। ऐसे में पार्टी छोड़ना सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि विश्वासघात है।'
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यह पहली बार नहीं है जब डिंपल यादव ने राघव चड्ढा को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले मैनपुरी में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि आप जनता के बीच जाकर चुनाव नहीं जीते थे, आप पार्टी की वजह से संसद पहुंचे थे। ऐसे में पार्टी छोड़ना गद्दारी ही कहलाएगा।
दरअसल, राघव चड्ढा ने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल समेत कई अन्य नेताओं ने भी पार्टी छोड़ी। बीजेपी में शामिल होने के दौरान बिहार के मंत्री नितिन नबीन भी मौजूद रहे।
बीजेपी में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा ने अपने फैसले का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने नियमों के तहत पार्टी छोड़ने की जानकारी सदन के अध्यक्ष को दे दी है। साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। राघव चड्ढा ने कहा कि अब पार्टी में ईमानदार कार्यकर्ताओं के लिए जगह नहीं बची है इसलिए यह फैसला लेना पड़ा।