Naresh Bhagoria
7 Jan 2026
लातूर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को कहा कि अगर मतदाताओं को लगता है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा वितरित किया जा रहा पैसा अनैतिक है, तो वे इसे स्वीकार कर शौचालय निर्माण पर खर्च कर सकते हैं। आगामी लातूर नगर निगम चुनाव के सिलसिले में एक रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने केंद्र सरकार पर उसकी विदेश नीति को लेकर हमला किया। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘AIMIM के चुनाव मैदान में उतरने के साथ ही प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं के बीच नकद राशि बांटना शुरू कर दिया। अगर हमने उम्मीदवार नहीं उतारे होते, तो पैसा नहीं बांटा जाता... पैसा ले लीजिए और अगर आपको लगता है कि यह अनैतिक और 'हराम' (अवैध) है, तो इसका इस्तेमाल शौचालय बनाने में कीजिए।’’
ओवैसी ने यह कहते हुए मुसलमानों से मजबूत राजनीतिक नेतृत्व बनाने का आह्वान किया कि अफसोस है कि अल्पसंख्यकों को छोड़कर हर समुदाय के पास राजनीतिक शक्ति है। उन्होंने कहा कि दलित और मुसलमान गरीब आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं लेकिन अब तक विकास उनके क्षेत्रों तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा, भाजपा राष्ट्रवाद की बात करती है, लेकिन किसान मर रहे हैं, युवा बेरोजगार हैं और वह सिर्फ लव जिहाद की बात करती है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर चुप हैं, जो एक हवाई जहाज में कहते हैं कि मोदी मुझे खुश करने के लिए निर्णय लेते हैं।
AIMIM प्रमुख ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार की माझी लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने पूछा, सरकार ने 9.30 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इस कर्ज को कौन चुकाएगा? उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने चाचा और राजनीतिक गुरु शरद पवार के प्रति वफादार नहीं रहा, वह जनता के प्रति कैसे वफादार हो सकता है?
वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस कानून का दुरुपयोग मस्जिदों को बंद करने और सदियों पुरानी दरगाहों के स्वामित्व को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है। ओवैसी ने 2006 के मुंबई ट्रेन बम धमाकों के एक दोषी की जेल में हुई मौत के हालात पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया, 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों में 185 लोगों की जान चली गई थी, जिसके चलते 11 मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने 19 साल जेल में बिताए। उनमें से एक की मौत हो गई, लेकिन कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि उसकी मौत कैसे हुई।