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आंगनबाड़ियों में अब सहायिकाएं बच्चों को परोसेंगी गरमा-गरम खाना

मिलेगा स्वादिष्ट-पौष्टिक भोजन, 4 हजार केंद्रों में पायलट प्रोजेक्ट
आंगनबाड़ियों में अब सहायिकाएं बच्चों को परोसेंगी गरमा-गरम खाना

अशोक गौतम-भोपाल। आंगनबाड़ी केंद्रों में अब सहायिकाएं बच्चों को गरमा-गरम नाश्ता और भोजन परोसेंगी। स्व सहायता समूहों के द्वारा ठंडा तथा नाश्ता और भोजन एक साथ देने की शिकायतें मिलने पर यह काम सहायिकाओं को सौंपने की तैयारी है। इसके बदले में सहायिकाओं को अलग से पांच सौ रुपए प्रति माह पारिश्रमिक मिलेगा।

प्रदेश में 97 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हैं। नई व्यवस्था सभी संभागों के एक-एक यूनिट में (चार हजार आंगनबाड़ी केंद्रो में) पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू करने की तैयारी की जा रही है। दो-तीन महीने के अंदर इसका परीक्षण किया जाएगा। बेहतर परिणाम आने के बाद इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश की आंगनबाड़ियों में लागू किया जाएगा।

भोजन व्यवस्था में परिवर्तन की मूल वजह यह है कि आंगनबाड़ी में सुबह 8:30 और 9 बजे तक नाश्ता और 12 बजे के करीब बच्चों को भोजन दिया जाना चाहिए। शिकायतें आ रही हैं कि समय पर न तो बच्चों को नाश्ता मिल रहा है और न ही भोजन दिया जा रहा है। कई बार भोजन और नाश्ता एक साथ वितरित कर दिया जाता है, इससे बच्चे या तो खाना खाते हैं या फिर उन्हें नाश्ता ही मिल पाता है।

स्कूल और आंगनबाड़ी के लिए साथ बनता है भोजन

नाश्ता और भोजन साथ परोसे जाने के पीछे भी बड़ी वजह है। स्वसहा यता समूह की महिलाएं स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों का एक साथ भोजन बनाती हैं। इससे आंगनबाड़ी के लिए भोजन और नाश्ता बनाने में देर हो जाती है। सहायिका आंगनबाड़ी में खाना बनाएंगी तो बच्चों की उपस्थिति के आधार पर बनाएंगी साथ ही गरम नाश्ता और भोजन मिलेगा।

पोषण वाटिका का लाभ भी मिलेगा

प्रदेश के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका पर काम हो रहा है। इससे सहायिका केंद्रों में सब्जी उगाएंगी और उसे बच्चों के भोजन के लिए उपयोग में लाएंगी। इससे कुपोषण पर अंकुश लगाया जा सकेगा। सहायिका बच्चों की इच्छा के अनुसार रोज के भोजन का मेन्यू भी आसानी से बदल सकेंगी। बच्चों को रोज करीब 1,500 कैलोरी की जरूरत होती है। आंगनबाड़ियों में बच्चों को करीब 500 कैलोरी की आपूर्ति करने का प्रयास होता है।

बच्चों को गरम भोजन देने के लिए खाना और नाश्ता बनाने का काम सहायिकाओं को देने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। परिणाम बेहतर आने पर पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। - निर्मला भूरिया, मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग मप्र

People's Reporter
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