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सबसे सस्ते तेल की फिर हुई एंट्री !भारत आ रहीं वेनेजुएला की राष्ट्रपति, अमेरिका क्यों दे रहा हर अपडेट?

वेनेजुएला ने दोबारा भारत को सस्ता कच्चा तेल बेचना शुरू कर दिया है और अब उसकी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज भारत दौरे पर आ सकती हैं। सवाल ये है कि इस पूरी डील की जानकारी अमेरिका क्यों दे रहा है? समझिए तेल, प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का पूरा खेल।
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भारत आ रहीं वेनेजुएला की राष्ट्रपति, अमेरिका क्यों दे रहा हर अपडेट?
भारत के लिए सस्ते तेल की सप्लाई फिर शुरू, वेनेजुएला बना बड़ा सप्लायर

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सिर्फ 8 दिनों में तीसरी बार तेल के दाम बढ़ाए गए हैं। लेकिन इसी बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई है। वो देश, जो कभी भारत को दुनिया का सबसे सस्ता कच्चा तेल बेचता था, अब फिर से भारतीय बाजार में लौट आया है। यह देश है वेनेजुएला। कुछ महीने पहले तक भारत वेनेजुएला से एक बूंद तेल भी नहीं खरीद रहा था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। मई 2026 में वेनेजुएला भारत को तेल सप्लाई करने वाले देशों की सूची में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। उसने सऊदी अरब और अमेरिका जैसे बड़े सप्लायर्स को पीछे छोड़ दिया है। ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक भारत इस महीने हर दिन 4 लाख 17 हजार बैरल से ज्यादा तेल वेनेजुएला से खरीद रहा है। भारत को सबसे ज्यादा तेल अभी रूस और संयुक्त अरब अमीरात से मिल रहा है, जबकि तीसरे स्थान पर अब वेनेजुएला आ चुका है।

राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज का भारत दौरा क्यों अहम?

इस पूरे घटनाक्रम को और खास बना रही है वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज की संभावित भारत यात्रा। रिपोर्ट्स के अनुसार वह अगले हफ्ते भारत आ सकती हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा समझौता हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इस यात्रा और संभावित डील की जानकारी वेनेजुएला की तरफ से नहीं, बल्कि अमेरिका की ओर से सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस पर संकेत दिए हैं। यही सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है कि आखिर अमेरिका इस पूरी डील को लेकर इतना सक्रिय क्यों दिख रहा है।

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार, फिर भी संकट में क्यों था वेनेजुएला?

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार माना जाता है। अनुमान है कि वहां 300 बिलियन बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। यह भंडार अमेरिका, रूस और सऊदी अरब के संयुक्त भंडार से भी बड़ा बताया जाता है। लेकिन वर्षों से अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते बेहद खराब रहे हैं। अमेरिका ने निकोलस मादुरो सरकार पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों का सबसे बड़ा असर तेल निर्यात पर पड़ा। इसी वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला से तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी। भारत पहले वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था क्योंकि वहां का क्रूड ऑयल भारी डिस्काउंट पर मिलता था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय कंपनियों के लिए भुगतान और शिपिंग मुश्किल हो गई थी।

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अब अमेरिका नरमी क्यों दिखा रहा है?

यहीं से शुरू होता है असली भू-राजनीतिक खेल। जानकार मानते हैं कि अमेरिका इस समय दुनिया भर के तेल बाजार में सप्लाई बनाए रखना चाहता है ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बेकाबू न हों। इसके साथ ही वह यह भी नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह रूस के तेल पर निर्भर हो जाए। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात को लेकर कुछ नरमी दिखाई है। इसका फायदा भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने तुरंत उठाया और वेनेजुएला से खरीद बढ़ा दी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका पूरी तरह पीछे हट गया है। तेल कारोबार से जुड़ी कई वित्तीय और शिपिंग व्यवस्थाएं अब भी अमेरिकी निगरानी में आती हैं। इसलिए वेनेजुएला से जुड़ी हर बड़ी खबर अमेरिकी एजेंसियों और मीडिया के जरिए बाहर आ रही है।

रूस से सस्ता तेल मिल रहा, फिर वेनेजुएला की जरूरत क्यों?

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था क्योंकि रूस भारी छूट पर तेल बेच रहा था। इससे भारत को काफी राहत मिली। लेकिन भारत किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। यही वजह है कि अब भारत रूस के साथ-साथ दूसरे विकल्प भी मजबूत कर रहा है। वेनेजुएला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में सप्लाई बाधित होने या कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।

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मध्य-पूर्व से तेल खरीद क्यों घटी?

बीते कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच टकराव का असर तेल सप्लाई पर भी दिखाई दिया। होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट प्रभावित होने से कई देशों की सप्लाई कम हो गई। अंतरराष्ट्रीय फर्म केप्लर के मुताबिक अप्रैल में इस क्षेत्र से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई थी। इसका असर भारत पर भी पड़ा। इराक से भारत को मिलने वाला तेल फरवरी में करीब 9 लाख 69 हजार बैरल प्रतिदिन था, जो अब घटकर लगभग 51 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया है। वहीं सऊदी अरब से सप्लाई भी लगभग आधी हो गई है। सऊदी अरब ने अपने तेल की कीमतें भी काफी बढ़ा दी हैं।

भारत की नई रणनीति क्या है?

भारत अब एक देश पर निर्भरता वाली नीति से दूर जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक भारत इस समय करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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