एमवाय,पीसी सेठी और चाचा नेहरू अस्पताल के पानी के सैंपल फेल:अस्पताल की टंकी में पहुंच रहा था दूषित पानी!

इंदौर। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल के बोरिंग के पानी की जांच में बैक्टीरिया मिलने के बाद इसे पीने योग्य नहीं माना गया है। इतना ही नहीं, पीसी सेठी अस्पताल और चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के पानी के सैंपल भी जांच में फेल पाए गए हैं। तीनों जगह पानी में ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं, जो पानी के दूषित होने का संकेत देते हैं। भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद नगर निगम ने शहरभर में पानी के स्रोतों की जांच तेज की है। इसी अभियान के तहत एमवाय अस्पताल, पीसी सेठी अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट सामने आते ही अस्पतालों की पानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
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पानी में मिला मल-मूत्र से जुड़ा बैक्टीरिया
नगर निगम की जांच में तीनों अस्पतालों के बोरिंग के पानी के सैंपल फेल मिले। अधिकारियों के मुताबिक पानी में बैक्टीरिया के साथ मल-मूत्र से जुड़े हानिकारक सूक्ष्मजीव भी पाए गए। इसके बाद नगर निगम ने तीनों अस्पताल प्रबंधन को पत्र भेजकर साफ चेतावनी दी कि बोरिंग के पानी का इस्तेमाल पीने के लिए न किया जाए।यानी जिन अस्पतालों में मरीज बीमारी से लड़ने के लिए पहुंचते हैं, वहीं दूषित पानी का इस्तेमाल उनके लिए एक अलग स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता था।
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एमवाय में साफ नर्मदा के पानी में मिल रहा था दूषित पानी
सबसे गंभीर स्थिति एमवाय अस्पताल की पानी व्यवस्था को लेकर सामने आई। अस्पताल में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए नगर निगम से नर्मदा के पानी का बल्क कनेक्शन लिया गया है। लेकिन पहले नर्मदा के पानी के साथ बोरिंग का पानी भी संपवेल में मिलाया जाता था। इसके बाद यही मिश्रित पानी अस्पताल की टंकी में पहुंचता था। ऐसे में साफ नर्मदा का पानी भी दूषित बोरिंग के पानी के संपर्क में आकर संदूषित हो सकता था।
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एक गलती और पूरी टंकी हो सकती थी दूषित
बोरिंग के पानी में बैक्टीरिया पाए जाने के बावजूद उसे नर्मदा के पानी के साथ मिलाने की व्यवस्था ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। टंकी में पहुंचने के बाद इसी पानी का इस्तेमाल अस्पताल परिसर में अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जाता था और पहले इसे पेयजल के रूप में भी इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। नगर निगम की रिपोर्ट के बाद अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
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अब बोरिंग का पानी अलग, टंकी में सिर्फ नर्मदा जल
जांच रिपोर्ट आने के बाद एमवाय अस्पताल प्रबंधन ने पानी की व्यवस्था में सुधार किया है। अब अस्पताल की टंकी नर्मदा के पानी से ही भरी जा रही है। बोरिंग के पानी को इसमें नहीं मिलाया जा रहा है। नगर निगम के जोनल अधिकारी गीतेश तिवारी के मुताबिक तीनों अस्पतालों के पानी के सैंपल फेल मिले हैं और प्रबंधन को इसकी जानकारी दे दी गई है। बोरिंग के पानी को पेयजल के रूप में इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए गए हैं।
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भागीरथपुरा कांड के बाद खुल रही पानी व्यवस्था की परतें
भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद शहर में पानी की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन और नगर निगम की जांच लगातार जारी है। सरकारी बोरिंग के साथ-साथ निजी बोरिंग के पानी के नमूनों की भी जांच की जा रही है। एमवाय, पीसी सेठी और चाचा नेहरू जैसे बड़े अस्पतालों के पानी के सैंपल फेल होने से साफ है कि सिर्फ मरीजों का इलाज ही नहीं, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पानी की शुद्धता भी उतनी ही अहम है।




















