इंदौर - एमवाय अस्पताल में व्यवस्थाओं की बेदर्दी और बदइंतजामी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ओपीडी की लाइट बंद रहने पर डॉक्टरों को मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर मरीजों की जांच करनी पड़ी। वायरल वीडियो में ओपीडी के कमरे नंबर 121 में पसरा अंधेरा साफ दिखता है और डॉक्टर मजबूरी में टॉर्च की रोशनी में मरीज का सामान्य परीक्षण कर रहे हैं।
कागजों पर मजबूत और जमीन पर ध्वस्त-
अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई आई कि पावर कट की स्थिति में पांच मिनट के भीतर जनरेटर स्वतः चालू हो जाता है और “मरीजों को कोई असुविधा नहीं हुई।” लेकिन वीडियो की सच्चाई खुद बता रही है कि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं कागजों पर मजबूत और जमीन पर ध्वस्त नजर आ रही हैं।
बुधवार को सामने आए इस वायरल वीडियो ने मरीजों और परिजनों का गुस्सा भड़का दिया है। वीडियो में दावा किया गया है कि यह घटना न्यूरोलॉजी विभाग की है, जहां पूरा कमरा अंधेरे में था और मरीजों को आवाजाही तक मोबाइल टॉर्च की मदद से करनी पड़ी।वीडियो बनाने वाला आवाज में कह रहा है। वीडियो में डॉक्टर एक महिला मरीज को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में देख रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद लोग रोशनी के अभाव में रास्ता तलाशते नजर आते हैं।इसके बाद वही व्यक्ति अस्पताल के बाहर का हिस्सा भी दिखाते हुए कहता है कि यहां लोग परेशान होकर लौट जाते हैं, उनका इलाज तक नहीं हो पाता। वीडियो के अंत में संबंधित व्यक्ति से सवाल पूछा जा रहा है कि “वीडियो बनाने की परमिशन किसने दी?” जानकारी के अनुसार, सुरक्षा गार्डों ने वीडियो रिकॉर्ड करने वाले को रोकने के साथ-साथ उसे वीडियो डिलीट करने का दबाव भी बनाया। सवाल यह है कि अगर सब कुछ सही था तो वीडियो डिलीट करवाने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों?
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव भी मान चुके हैं कि वीडियो असली है और बुधवार सुबह का है। उन्होंने दावा किया कि यह बिजली कटौती एमपीईबी द्वारा तकनीकी कार्य के कारण थी और “बहुत थोड़े समय के लिए” थी। उनका कहना है कि अस्पताल में नियमित सप्लाई चालू थी और जल्द ही बिजली बहाल हो गई थी।