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UN में भारत का पाकिस्तान को कड़ा संदेश :कहा- आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है; FATF, AI और डार्क वेब पर भी दुनिया को चेताया

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर दुनिया को दो टूक संदेश दिया। भारतीय प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंड खत्म होने चाहिए। FATF नियमों के सख्त पालन, AI और डार्क वेब के दुरुपयोग पर रोक, आतंक पीड़ितों को न्याय और वैश्विक सहयोग बढ़ाने की अपील की।
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कहा- आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है; FATF, AI और डार्क वेब पर भी दुनिया को चेताया

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर बेहद स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश (P. Harish) ने बिना किसी देश का नाम लिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या रणनीतिक कारण से सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि आतंकवादी का कोई धर्म, रंग या श्रेणी नहीं होती और दुनिया को 'अच्छे' और 'बुरे' आतंकवादी की सोच छोड़नी होगी। भारत ने FATF मानकों के सख्त पालन, नई तकनीकों के दुरुपयोग पर रोक और आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने पर भी जोर दिया।

भारत दशकों से सीमापार आतंकवाद का शिकार रहा

संयुक्त राष्ट्र में यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म स्ट्रैटेजी की नौवीं समीक्षा बैठक के दौरान पी. हरीश ने कहा कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की वजह से भारत ने हजारों लोगों की जान गंवाई है, परिवार उजड़े हैं और समाज को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसी अनुभव ने भारत को यह स्पष्ट सोच दी है कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।  उन्होंने कहा कि, चाहे कोई राजनीतिक कारण हो या रणनीतिक हित, आतंकवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा होनी चाहिए।

पाकिस्तान पर बिना नाम लिए साधा निशाना

भारत ने अपने संबोधन में किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन संदेश स्पष्ट था। पी. हरीश ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब दुनिया दोहरे मानदंड छोड़कर आतंकवादियों, उनके योजनाकारों, वित्तपोषकों (Financiers) और प्रायोजकों (Sponsors) के खिलाफ समान कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले हर नेटवर्क को कानून के दायरे में लाना होगा।

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CCIT को लागू करने की फिर उठाई मांग

भारत ने एक बार फिर Comprehensive Convention on International Terrorism (CCIT) को जल्द लागू करने की मांग दोहराई। पी. हरीश ने कहा कि, भारत वर्ष 2006 से इस वैश्विक समझौते की पैरवी करता रहा है। इसका उद्देश्य आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सुरक्षित ठिकाने, हथियार, वित्तीय मदद और अन्य संसाधनों तक पहुंचने से रोकना है। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने का समय आ गया है।

भारत ने दुनिया के सामने रखीं 6 बड़ी प्राथमिकताएं

1. आतंकवाद पर दोहरा रवैया खत्म हो
भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के मामलों में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं अपनाना चाहिए। आतंकवाद के अपराधियों, योजनाकारों, फंडिंग करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों को जवाबदेह बनाना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।

2. आतंकवाद की फंडिंग पर लगे पूरी तरह रोक
भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे अहम मोर्चा उसकी फंडिंग रोकना है। इसके लिए देशों के बीच वित्तीय खुफिया जानकारी (Financial Intelligence) साझा करने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। भारत ने Financial Action Task Force (FATF) के सभी मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील करते हुए कहा कि दुनिया का कोई भी हिस्सा आतंकवाद के लिए सुरक्षित वित्तीय ठिकाना नहीं बनना चाहिए।

3. AI, ड्रोन और डार्क वेब बन रहे नए खतरे
भारत ने चेतावनी दी कि आतंकवादी संगठन अब तेजी से आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं-

  • एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन
  • ड्रोन
  • स्वायत्त (Autonomous) हथियार
  • सोशल मीडिया
  • मैपिंग एप्लिकेशन
  • ऑनलाइन कट्टरपंथ (Radicalization)
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • डीपफेक
  • वर्चुअल एसेट्स
  • डार्क वेब

भारत ने कहा कि तकनीक की रफ्तार कानून और नियामक व्यवस्था से कहीं अधिक तेज है। इसलिए सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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4. आतंकवाद के पीड़ितों को मिले न्याय
भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर आतंकवाद पर केवल नीतियों और प्रक्रियाओं की चर्चा होती है, जबकि पीड़ितों की आवाज पीछे छूट जाती है। भारत ने मांग की है कि, आतंकवाद से प्रभावित लोगों को सम्मान, न्याय और बेहतर पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।

5. ग्लोबल साउथ के देशों को मिले सहयोग
भारत ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रम प्रत्येक देश की जरूरतों के अनुसार होने चाहिए। विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों को तकनीकी और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए, न कि उन पर एक जैसा ढांचा थोपना चाहिए।

6. आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है
अपने संबोधन के अंत में पी. हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है। उसे किसी भी बहाने या शिकायत के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि दुनिया को मिलकर इस हिंसक विचारधारा को जड़ से खत्म करना होगा।

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PM मोदी का संदेश भी दोहराया

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आतंकवाद पर दिया गया संदेश भी दोहराया। पी. हरीश ने कहा कि, कहीं भी आतंकवाद, हर जगह शांति के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी तरह की अस्पष्टता बर्दाश्त नहीं कर सकती। आतंकवाद के पीड़ित न्याय के हकदार हैं और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है।

भारत का स्पष्ट संदेश

भारत ने दोहराया कि, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रणनीति केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र और सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

भारत की 6 प्रमुख मांगें 

मुद्दा

भारत की मांग

दोहरे मानदंड

आतंकवाद पर 'अच्छे' और 'बुरे' का फर्क खत्म किया जाए

FATF

सभी देशों में FATF मानकों का सख्ती से पालन हो

आतंक की फंडिंग

वित्तीय नेटवर्क और फंडिंग पर वैश्विक रोक लगे

नई तकनीक

AI, डीपफेक, ड्रोन और डार्क वेब के दुरुपयोग पर नियंत्रण

पीड़ितों का अधिकार

आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय और पुनर्वास मिले

वैश्विक सहयोग

सभी देश मिलकर आतंकवादियों और उनके समर्थकों पर समान कार्रवाई करें

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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