फायर सेफ्टी नियम होंगे सख्त:भवन मालिकों पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ, बड़े भवनों में फायर सुपरवाइजर अनिवार्य

अशोक गौतम, भोपाल। दिल्ली के एक होटल में हुई भीषण आग की घटना के बाद मध्यप्रदेश सरकार फायर सेफ्टी को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार अगले विधानसभा सत्र में मप्र अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक लाने जा रही है। प्रस्तावित विधेयक के ड्राफ्ट में फायर सेफ्टी से जुड़े कई नए और कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। ड्राफ्ट के मुताबिक अब भवन मालिकों को संपत्तिकर के साथ फायर सेफ्टी उपकर जैसे अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है। वहीं बड़े भवनों, मॉल, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और मल्टीस्टोरी इमारतों में फायर सुपरवाइजर की नियुक्ति अनिवार्य की जाएगी।
फायर सुपरवाइजर रखेगा सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
फायर सुपरवाइजर का काम भवन में फायर सेफ्टी प्रावधानों को लगातार लागू रखना, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करना और उसकी रिपोर्ट नगर निगम को देना होगा। भवन मालिकों के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा। यदि किसी भवन के पास फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र या एनओसी नहीं पाई गई तो भवन मालिक पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
जरूरत पड़ने पर पड़ोसी की टंकी का पानी भी ले सकेगी फायर टीम
नए कानून के तहत फायर ब्रिगेड टीम को आग बुझाने के दौरान किसी भी जल स्रोत से पानी लेने का अधिकार होगा। जरूरत पड़ने पर पड़ोसी की पानी की टंकी का उपयोग भी किया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति पानी देने से इनकार करता है तो उस पर 15 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा 3 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है।
रास्ता रोकना पड़ेगा भारी
फायर ब्रिगेड के रास्ते में बाधा डालने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। फायर टीम को रास्ता खाली कराने और अवरोध हटाने का अधिकार दिया जाएगा। रास्ता रोकने वालों पर 1 लाख रुपए तक का अर्थदंड लगाया जा सकेगा। विधेयक में यह भी तय किया गया है कि आग की सूचना मिलने के बाद शहरी क्षेत्रों में 6 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 मिनट के भीतर फायर वाहन मौके पर पहुंचेगा।
आग लगने वाले भवन को किया जा सकेगा सील
जिस भवन में आग लगेगी, उसे फायर सेफ्टी अधिकारी जांच पूरी होने तक सील कर सकेगा। जांच के बाद ही सील हटाई जाएगी। यदि भवन मालिक सील तोड़ता है या उससे छेड़छाड़ करता है तो उस पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना नहीं देने पर सजा का भी प्रावधान रहेगा।
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फॉल्स कॉल पर भी होगी सख्ती
फायर स्टेशन पर झूठी, मजाकिया या फॉल्स कॉल करने वालों पर भी कार्रवाई होगी। गलत सूचना देने पर 20 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। राज्य, जिला, जनपद और नगरीय निकाय स्तर पर कॉल सेंटर बनाए जाएंगे। फायर वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा और तय समय में मौके पर पहुंचना फायर टीम की जिम्मेदारी होगी।
भविष्य की जरूरतों के हिसाब से होगा नया कानून
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नए विधेयक में भारत सरकार के मॉडल एक्ट के अनुरूप बदलाव किए जा रहे हैं। भविष्य में प्रदेश में बड़ी इमारतें, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रीज बढ़ेंगी, इसलिए अत्याधुनिक उपकरण, बेहतर तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन की व्यवस्था जरूरी है।
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15 मिनट में पहुंची थी फायर टीम
भोपाल के कोलार निवासी दिलीप परते ने बताया कि हाल ही में उनके इलाके के पार्क में आग लगी थी लेकिन फायर टीम ने समय पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। उनके मुताबिक सूचना मिलने के करीब 15 मिनट बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई थी।












