Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

जबलपुर :हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग ने गर्भपात से किया इनकार; मां बनने की मिली इजाजत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय रेप पीड़िता को बच्चे को जन्म देने की अनुमति दी है। पीड़िता और उसके परिवार ने गर्भपात से इनकार किया था। अदालत ने राज्य सरकार को मां और बच्चे की देखभाल, इलाज, शिक्षा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग ने गर्भपात से किया इनकार; मां बनने की मिली इजाजत

जबलपूर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 16 वर्षीय रेप पीड़िता को बच्चे को जन्म देने की अनुमति दे दी है। मामला खरगोन जिले का है, जहां दुष्कर्म की शिकार हुई एक नाबालिग किशोरी गर्भवती हो गई थी। गर्भ 24 सप्ताह से ज्यादा का होने और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण मामला अदालत तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कहा कि वह गर्भपात नहीं कराना चाहती और बच्चे को जन्म देना चाहती है। उसके माता-पिता ने भी इस फैसले का समर्थन किया। अदालत ने पीड़िता और उसके परिवार की इच्छा को ध्यान में रखते हुए बच्चे के जन्म की अनुमति दे दी।

पॉक्सो कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा मामला

जानकारी के मुताबिक, खरगोन जिले के बालकवाड़ा थाना क्षेत्र में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक होने के कारण मंडलेश्वर स्थित पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने मामले को उचित आदेश के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान बालकवाड़ा थाना के सब-इंस्पेक्टर मिथुन चौबे की मौजूदगी में पीड़िता और उसके माता-पिता अदालत में पेश हुए। पहचान की पुष्टि के बाद सभी ने एक साथ कहा कि वे गर्भपात नहीं कराना चाहते।

जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की बेंच ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की वेकेशन बेंच में हुई। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता डी.आर. विश्वकर्मा ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना कि जब पीड़िता और उसका परिवार गर्भपात नहीं चाहता और बच्चा जन्म देने की इच्छा रखता है, तो उनकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने गर्भ जारी रखने की अनुमति दी।

Breaking News

मां और बच्चे की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाएगी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद मां और नवजात को सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अदालत ने निर्देश दिया कि इलाज, प्रसव, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ा पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आर्थिक कारणों से मां या बच्चे को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ये भी पढ़ें: MP Weather Update : 35 जिलों में आंधी-बारिश, 5 जिलों में हीटवेव का अलर्ट; जानिए अगले 4 दिन कैसा रहेगा मौसम

बच्चे की पढ़ाई और परवरिश की भी होगी व्यवस्था

हाईकोर्ट ने खरगोन कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि नवजात के 16 वर्ष की आयु तक उसकी देखभाल सुनिश्चित की जाए। इसमें शिक्षा, भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी जरूरतें शामिल रहेंगी। अदालत ने कहा कि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और राज्य की जिम्मेदारी है कि उसे आवश्यक सहायता मिले। 

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

Latest Posts