सिलिगुड़ी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया। करीब 18 एकड़ भूमि पर बन रहे इस मंदिर को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से ही जाना जाएगा। शिलान्यास कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाली भाषा बोलने वाले प्रवासी मजदूरों को भाजपा शासित राज्यों में प्रताड़ित किया जा रहा है।
ममता का आरोप- कई राज्यों में मजदूरों के साथ अत्याचार
उन्होंने आरोप लगाया कि असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में बंगाली भाषी मजदूरों को पीटा जा रहा है। ममता ने कहा, “लोगों को पीटना धर्म नहीं है। धर्म का अर्थ जीवन देना है। जीवन का मतलब है कि जब तक हम जीवित हैं, अच्छे और सद्गुणों वाले कर्म करते रहें।” उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा, “जैसा कि गांधीजी ने कहा था— ईश्वर अल्लाह तेरा नाम, सबको सम्मति दे भगवान।”
हालांकि, इस मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर उत्तर बंगाल की राजनीति गरमा गई है। गुरुवार को दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा के केंद्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट ने सिलीगुड़ी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण को ट्रस्टी बोर्ड के माध्यम से होने वाला बताया जा रहा है, लेकिन पूरा आयोजन सरकारी बैनर के तहत किया जा रहा है, जो आपत्तिजनक है।
ममता ने अपनी संबोधन में कहीं ये बातें
- ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बांग्ला भाषी मजदूरों के साथ अत्याचार भाजपा शासित राज्यों में हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बंगाल के लोगों को बाहर के राज्यों में प्रताड़ित किया जा रहा है, तो भाजपा कैसे यह उम्मीद कर सकती है कि उसे पश्चिम बंगाल में जनता का समर्थन मिलेगा। ममता ने भाजपा को “बेशर्म पार्टी” करार देते हुए कहा कि वह जानबूझकर बंगाल में दंगे भड़काने आई है।
- मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने दम पर चुनाव नहीं जीत सकती, इसलिए साजिशों का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा झूठ बोलती है और लूट की राजनीति करती है।
- अल्पसंख्यक समुदायों से अपील करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वे शांति बनाए रखें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी है।
- SIR को लेकर ममता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मतुआ, राजबंशी और आदिवासी समुदायों के लोगों के नाम चुन-चुनकर सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मालदा में एक खास समुदाय के करीब 90 हजार लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, जबकि कई जिलों में आदिवासी नागरिकों के नाम भी हटाए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे में आम लोग आखिर जाएं तो कहां जाएं।
- मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर दिन व्हाट्सऐप के जरिए नए-नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिससे दबाव में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) परेशान हो गए हैं। ममता ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े हालातों में अब तक लगभग 100 लोगों की मौत हो चुकी है।