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Magh Mela : 3 जनवरी से शुरू होगा आस्था, साधना और आत्मिक शुद्धि का पर्व, संगम में डुबकी लगाने पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु

प्रयागराज में माघ मेला 3 जनवरी 2026 से शुरू होगा। मेले में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाएंगे। यह मेला 44 दिनों तक चलेगा।
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 3 जनवरी से शुरू होगा आस्था, साधना और आत्मिक शुद्धि का पर्व, संगम में डुबकी लगाने पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रयागराज। माघ मेला हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह मेला हर वर्ष पौष पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है। वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी से होगी और इसका समापन 15 फरवरी को होगा। लगभग 44 दिनों तक चलने वाले इस पावन आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान के लिए एकत्रित होते हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

    रहेंगे पांच स्नान पर्व 

    माघ मेले में पवित्र स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मेले में किए गए स्नान से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। विशेष रूप से पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के दिन किया गया स्नान अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    एक महीने का कल्पवास

    कल्पवास में श्रद्धालु संगम तट पर निवास करते हैं और उपवास, तप, मंत्र-जप तथा साधना में समय व्यतीत करते हैं। कल्पवास सामान्यतः पूरे एक माह का होता है, हालांकि समय की कमी होने पर कुछ दिनों का कल्पवास भी किया जा सकता है। इस दौरान ब्रह्मचर्य, संयम और सात्विक जीवनशैली का पालन किया जाता है। शाकाहारी भोजन, सादा जीवन और ईश्वर चिंतन कल्पवास के मुख्य नियम हैं।

    प्रवचन सुनना लाभकारी

    माघ मेले में साधु-संतों के प्रवचन सुनना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इनके माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है और मन की नकारात्मकता दूर होती है। इसके साथ ही योग और ध्यान का अभ्यास मन को शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

    मंदिरों में दान

    माघ मेले के दौरान प्रयागराज के प्रमुख मंदिरों के दर्शन और यथाशक्ति दान अवश्य करना चाहिए। दान से आत्मिक संतोष प्राप्त होता है और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। इस प्रकार माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अनुपम अवसर है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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