हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। यह पर्व शक्ति साधना को समर्पित होता है और नौ दिनों तक मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि आती है। इनमें दो प्रकट नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) और दो गुप्त नवरात्रि (माघ और आषाढ़) होती हैं। गुप्त नवरात्रि में साधना गुप्त रूप से की जाती है, इसलिए इसे गुप्त कहा जाता है।
पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है।
शुरुआत: 19 जनवरी 2026 (सोमवार)
समापन: 27 जनवरी 2026 (मंगलवार)
उदयातिथि के अनुसार गुप्त नवरात्रि का आरंभ 19 जनवरी 2026 से होगा।
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ:
19 जनवरी 2026, सुबह 01:21 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त:
20 जनवरी 2026, सुबह 02:14 बजे
घटस्थापना मुहूर्त:
सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त:
दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक
इन नौ दिनों में शुभ और मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, जो लंबे समय से रुके हुए थे। इस अवधि में किए गए कार्य फलदायी माने जाते हैं।
इस बार नवरात्रि के दौरान 2 सर्वार्थसिद्धि योग और 4 रवि योग बन रहे हैं-
19 जनवरी: कुमार योग, सर्वार्थसिद्धि योग
20 जनवरी: द्विपुष्कर योग, राजयोग
21 जनवरी: राजयोग, रवि योग
22 जनवरी: रवि योग
23 जनवरी: कुमार योग, रवि योग
24 जनवरी: रवि योग
25 जनवरी: रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग
27 जनवरी: सर्वार्थसिद्धि योग
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की पूजा की जाती है-
गुप्त नवरात्रि को गुप्त साधना, तंत्र सिद्धि और शक्ति उपासना के लिए विशेष माना जाता है। देवी भागवत महापुराण में चारों नवरात्रियों का उल्लेख मिलता है।
यदि हवन संभव न हो तो नौ दिन का संकल्प लेकर मंत्र जाप भी किया जा सकता है।
मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, धूप, दीपक, लाल फूल, जौ, कलश, नारियल, पंचमेवा, दूध, दही, फल, गंगाजल, मौली, रोली, हवन सामग्री, पूजा थाली, लाल या श्वेत वस्त्र आदि।
मान्यता है कि इस विधि से की गई पूजा से मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधक की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।