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गुना के क्राइस्ट स्कूल की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता पर विवाद, ABVP ने सौंपा ज्ञापन; प्रबंधन ने दी सफाई

गुना के क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में छात्रा की राजनीतिक संदेश वाली वेशभूषा पर विवाद हुआ। ABVP ने ज्ञापन सौंपा, जबकि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों की भूमिका बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया।
गुना के क्राइस्ट स्कूल की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता पर विवाद, ABVP ने सौंपा ज्ञापन; प्रबंधन ने दी सफाई

गुना स्थित क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में कक्षा एक की छात्रा की वेशभूषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्रा की वेशभूषा और उस पर लिखे संदेशों को राजनीतिक मुद्दों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की गुना इकाई ने स्कूल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर आपत्ति जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं स्कूल प्रबंधन ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि वह इस प्रस्तुति से सहमत नहीं है। प्रबंधन के अनुसार छात्रा को इस वेशभूषा में तैयार करके भेजने का निर्णय उसके अभिभावकों का था। स्कूल ने कार्यक्रम की प्रभारी शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी करने की भी जानकारी दी है।

छात्रा की वेशभूषा में बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार का जिक्र

जानकारी के मुताबिक मंगलवार को स्कूल में आयोजित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के दौरान कक्षा एक की छात्रा स्कूल यूनिफॉर्म में मंच पर पहुंची थी। उसके मुंह पर पट्टी बंधी थी और हाथ तथा पीठ पर तख्तियां लगी थीं। इन तख्तियों पर बेरोजगारी, महंगाई, नफरत, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को 'प्रेजेंट' तथा लोकतंत्र को 'एब्सेंट' दिखाया गया था। पीठ पर लिखे संदेश में लोकतंत्र को पाठशाला से बाहर किए जाने की बात भी कही गई थी। इस प्रस्तुति की तस्वीरें और खबरें सामने आने के बाद शहर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई। विवाद का मुख्य मुद्दा यह बना कि स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक छोटी बच्ची के माध्यम से राजनीतिक संदेश प्रस्तुत किया जाना कितना उचित है।

ABVP ने प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन, 72 घंटे में जवाब की मांग

मामले को लेकर ABVP की गुना इकाई ने स्कूल के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। परिषद ने कहा कि शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देना होना चाहिए। ABVP ने आयोजन प्रभारी और संबंधित शिक्षकों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी और बाल अधिकार संरक्षण आयोग को मामले की रिपोर्ट भेजने तथा 72 घंटे के भीतर स्कूल प्रबंधन का आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग रखी है। परिषद ने चेतावनी दी है कि संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर वह संबंधित बाल अधिकार और शैक्षणिक प्राधिकरणों के समक्ष वैधानिक शिकायत दर्ज कराएगी।

स्कूल प्रबंधन बोला- अभिभावकों ने घर से तैयार करके भेजा

विवाद के बीच क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य फादर बाबू थारायिल सीएमआई ने स्पष्टीकरण जारी किया। प्रबंधन ने कहा कि विद्यालय इस प्रकार की प्रस्तुति का समर्थन नहीं करता और न ही इससे सहमत है। उसके अनुसार, छात्रा की वेशभूषा प्रतियोगिता के लिए तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थी। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि शिक्षकों ने छात्रा को इस वेशभूषा में तैयार नहीं किया था और न ही उसे इस तरह के संदेश देने के निर्देश दिए थे। स्पष्टीकरण में कहा गया कि बच्ची को इस रूप में तैयार करके भेजने का निर्णय उसके अभिभावकों ने लिया था। प्रबंधन ने यह भी बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यक्रम की प्रभारी शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। स्कूल के मुताबिक मामले की समीक्षा के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।

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सोशल मीडिया पर भी चर्चा, कांग्रेस नेताओं ने साझा की तस्वीरें

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। खबर के मुताबिक प्रतियोगिता में शामिल छात्रा शहर के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता की पोती बताई जाती है। हालांकि, इस संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह सहित कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने छात्रा की वेशभूषा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। इन पोस्ट के जरिए भाजपा सरकार पर निशाना साधे जाने की बात सामने आई है। इस तरह स्कूल की एक फैंसी ड्रेस प्रस्तुति अब शिक्षा, बच्चों के कार्यक्रमों में राजनीतिक संदेशों और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी से जुड़े सवालों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

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जांच और स्कूल की कार्रवाई पर टिकी नजरें

फिलहाल ABVP ने जांच और जवाबदेही की मांग की है, जबकि स्कूल प्रबंधन ने प्रस्तुति से असहमति जताते हुए प्रभारी शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि स्कूल की समीक्षा में क्या सामने आता है और शिक्षा विभाग या बाल अधिकार से जुड़े प्राधिकरण इस मामले में कोई कदम उठाते हैं या नहीं।

Rajkumar Rajak
By Rajkumar Rajak

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