लखनऊ अग्निकांड में चौंकाने वाला खुलासा :मंजूर सीमा से 70% ज्यादा बिजली लोड, क्या इसी लापरवाही ने ली 15 जानें?

लखनऊ। अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब जांच में यह बात सामने आई है कि जिस तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई, वहां बिजली का इस्तेमाल स्वीकृत सीमा से काफी ज्यादा किया जा रहा था। शुरुआती तकनीकी जांच में पाया गया है कि बिल्डिंग को 20 किलोवाट बिजली लोड की मंजूरी मिली थी, लेकिन वास्तविक खपत 34 केवीए से भी ज्यादा पहुंच चुकी थी। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों का फोकस अब सिर्फ आग लगने के कारणों पर नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था में बरती गई लापरवाही पर भी केंद्रित हो गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि यह पता लगाया जाए कि क्या ओवरलोड बिजली सिस्टम ने हादसे को और भयावह बनाने में कोई भूमिका निभाई थी।
महीनों से बढ़ रहा था बिजली का दबाव
जांच में सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि यह स्थिति अचानक नहीं बनी थी। अप्रैल महीने से ही बिल्डिंग में बिजली की खपत स्वीकृत सीमा से ऊपर दर्ज की जा रही थी। उस समय लोड 24 केवीए से ज्यादा पहुंच चुका था और इसके बाद लगातार बढ़ता गया। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी बिल्डिंग में लंबे समय तक क्षमता से ज्यादा बिजली का उपयोग होता है, तो वायरिंग, केबल, ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरणों पर अलग से ज्यादा दबाव पड़ता है। ऐसे हालात में शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
किराएदारों ने पहले भी दी थी चेतावनी
स्थानीय लोगों और बिल्डिंग से जुड़े लोगों के अनुसार, कई महीनों से बिजली संबंधी समस्याएं सामने आ रही थीं। बार-बार एमसीबी ट्रिप होने और बिजली सप्लाई बाधित होने की शिकायतें भी की जाती थीं। आसपास के लोगों का कहना है कि ये संकेत किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जब लगातार ओवरलोड की स्थिति दर्ज हो रही थी, तब जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
सुरक्षा सिस्टम पर भी उठ रहे सवाल
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बढ़े हुए लोड के बावजूद सुरक्षा तंत्र ने काम क्यों नहीं किया। सामान्य परिस्थितियों में ज्यादा लोड होने पर सुरक्षा उपकरण बिजली सप्लाई को तुरंत बंद कर देते हैं, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। अधिकारियों के अनुसार, यह जांच की जा रही है कि कहीं सुरक्षा उपकरणों में तकनीकी खामी तो नहीं थी या फिर सिस्टम को नजरअंदाज किया गया। बिजली सुरक्षा विभाग और बिजली आपूर्ति प्रशासन की टीम इस पहलू की गहराई से जांच कर रही है।
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रिकॉर्ड में भी मिली संदिग्ध एंट्री
जांच के दौरान बिजली कनेक्शन से जुड़े दस्तावेजों में भी एक असामान्य तथ्य सामने आया है। रिकॉर्ड में कनेक्शन की तिथि वर्ष 2000 की जगह 1 जनवरी 1911 दर्ज मिली है। फिलहाल आग लगने की सटीक वजह सामने नहीं आई है। बिजली सुरक्षा विभाग और बिजली आपूर्ति प्रशासन की टीम तकनीकी जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।












