नई दिल्ली। देश में एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब शहरी क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर अनिवार्य किया गया है। वहीं ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह अवधि 45 दिन तय की गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम गैस सिलेंडर की मांग को संतुलित रखने और घबराहट में की जा रही अतिरिक्त बुकिंग को रोकने के लिए उठाया गया है।
दरअसल, हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईंधन की संभावित सप्लाई को लेकर फैल रही अफवाहों के कारण कई जगहों पर लोग ज्यादा सिलेंडर बुक कराने लगे थे। इससे गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर अचानक दबाव बढ़ गया। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल तय करने का फैसला लिया है।
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, एलपीजी की खपत का पैटर्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग होता है। शहरों में रहने वाले परिवार आमतौर पर गैस का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, क्योंकि वहां खाना बनाने से लेकर कई अन्य कामों में एलपीजी का उपयोग होता है। इसी वजह से शहरी उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर रखा गया है। यानी एक सिलेंडर लेने के बाद उपभोक्ता 25 दिन पूरे होने के बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कर पाएंगे।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की खपत अपेक्षाकृत कम होती है। कई गांवों में लोग अभी भी आंशिक रूप से लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह अंतराल 45 दिन निर्धारित किया गया है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक नए नियम लागू करने की सबसे बड़ी वजह यह है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में लोगों ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया था। कुछ जगहों पर जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आईं। अचानक बढ़ी बुकिंग के कारण कई गैस एजेंसियों में लंबी कतारें लगने लगीं और डिलीवरी सिस्टम पर भी दबाव बढ़ गया। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए नियम लागू किए कि गैस सिलेंडर उन उपभोक्ताओं तक समय पर पहुंचे जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी गैस की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय लगभग ढाई दिन के आसपास बना हुआ है। सरकार का कहना है कि कुछ इलाकों में अचानक मांग बढ़ने के कारण अस्थायी दबाव की स्थिति बनी है, लेकिन यह स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार यह नियम स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी व्यवस्था के तौर पर लागू किए गए हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ मांग को संतुलित रखना और सप्लाई चेन पर अनावश्यक दबाव को कम करना है। यदि आने वाले समय में स्थिति सामान्य बनी रहती है और मांग संतुलित रहती है, तो इन नियमों की समीक्षा भी की जा सकती है।