Aakash Waghmare
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Manisha Dhanwani
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Aakash Waghmare
7 Jan 2026
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से किसानों की बदहाली को उजागर करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। धान बिक्री के लिए लंबे समय से टोकन न मिलने से परेशान एक किसान ने आत्महत्या के इरादे से कीटनाशक का सेवन कर लिया। हालत गंभीर होने पर उसे जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज जारी है। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि प्रदेश में धान खरीदी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
हरदी बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोरबी गांव निवासी 40 वर्षीय किसान सुमेर सिंह गोड़ के पास करीब 3 एकड़ 75 डिसमिल भूमि है। इस साल उन्होंने 68 क्विंटल से अधिक धान का उत्पादन किया, लेकिन सरकारी खरीदी केंद्र में धान बेचने के लिए आवश्यक टोकन उन्हें लगातार नहीं मिल पा रहा था।
किसान के पास मोबाइल फोन नहीं होने के कारण ऑनलाइन प्रक्रिया और भी जटिल हो गई। बार-बार प्रयासों के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मानसिक रूप से टूट चुके किसान ने रविवार देर रात कीटनाशक पी लिया।

किसान की पत्नी मुकुंद बाई ने बताया कि, देर रात करीब 1 बजे उनके पति ने कीटनाशक का सेवन किया। गिलास गिरने की आवाज सुनकर जब वह कमरे में पहुंचीं, तो पति की हालत बिगड़ चुकी थी। पड़ोसियों की मदद से पहले उन्हें हरदी बाजार स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया।
स्थानीय निवासी संजय श्रीवास्तव के अनुसार, सुमेर सिंह गोड़ ने टोकन कटवाने के लिए कई बार दुकानों, पटवारी कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगाए। इसके अलावा पीए के माध्यम से आवेदन दिया गया और बाद में जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन करीब डेढ़ महीने तक कोई समाधान नहीं निकला।

घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचीं और किसान से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
सांसद ने कहा, जहां आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, वहां आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर हो रहा है। जब हमारे अन्नदाता खतरे में हैं, तो हम सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि, कांग्रेस शासनकाल में किसानों को धान बेचने के लिए इस तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती थी और वर्तमान सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले महासमुंद जिले के बागबाहरा में भी टोकन न मिलने से परेशान एक किसान ने ब्लेड से अपना गला काट लिया था। उसकी सांस नली कट गई थी और हालत गंभीर होने पर उसे रायपुर रेफर किया गया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जानकारी ली जा रही है। हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि अगर समय रहते किसान की शिकायत का समाधान कर दिया जाता और धान बिक्री के लिए टोकन की व्यवस्था सरल एवं सुलभ होती, तो शायद किसान को आत्महत्या जैसे गंभीर कदम तक नहीं पहुंचना पड़ता। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की खामियों को उजागर करती है।
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