सिस्टम की बेरुखी या किसान की बेबसी?24 घंटे में दूसरे किसान ने पिया जहर, कोरबा में गहराया धान खरीदी का संकट

कोरबा जिले में धान खरीदी में तकनीकी बाधाओं और रकबा कटौती की समस्या से परेशान किसानों ने आत्महत्या जैसी कोशिश की। 24 घंटे में दो किसानों ने जहर खाया, प्रशासन ने पटवारी सस्पेंड और तहसीलदार को नोटिस जारी किया। किसानों की सुरक्षा और फसल बिक्री की समस्याओं को तुरंत सुलझाने के लिए कड़ा कदम उठाया गया।
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24 घंटे में दूसरे किसान ने पिया जहर, कोरबा में गहराया धान खरीदी का संकट
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कोरबा। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी में लगातार तकनीकी बाधाओं और रकबा कटौती की समस्या ने अन्नदाताओं की जान लेनी शुरू कर दी है। मात्र 24 घंटे के भीतर दो किसानों ने आत्महत्या की कोशिश की। ताजा मामला हरदी बाजार तहसील का है, जहां एक वृद्ध किसान अपनी पीड़ा लेकर तहसील कार्यालय पहुंचा और वहां जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश की। हालांकि, जनपद उपाध्यक्ष के समय रहते हस्तक्षेप से उसकी जान बच गई। वहीं प्रशासन ने पटवारी निलंबित और तहसीलदार को नोटिस जारी कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    क्या है पूरा मामला

    जानकारी के मुताबिक, कोरबा जिले के हरदी बाजार तहसील में धान खरीदी में तकनीकी समस्याओं और रकबा कटौती की वजह से 60 वर्षीय किसान बैसाखू गोंड़ ने कीटनाशक खाकर आत्मघाती कदम उठाया। किसान ग्राम झांझ का निवासी है और पिता का नाम भुरूवा है। उसने बताया कि, पोर्टल पर उसके खेती योग्य रकबे को कम दिखाया गया, जिससे वह अपनी पूरी पैदावार नहीं बेच पा रहा था।

    जनपद उपाध्यक्ष बने मसीहा

    जानकारी के अनुसार, ग्राम झांझ निवासी 60 वर्षीय बैसाखू गोंड़ पिता भुरूवा, धान की बिक्री न हो पाने और रकबा कम दिखाए जाने से मानसिक रूप से टूट चुका था। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे वह कीटनाशक पीकर सीधा तहसील कार्यालय पहुंच गया। जैसे ही उसने जहर सेवन की बात बताई, परिसर में हड़कंप मच गया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे जनपद उपाध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने संवेदनशीलता दिखाई और तुरंत अपनी गाड़ी से पीड़ित किसान को सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जिससे उसकी जान बच गई।

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    24 घंटे में दूसरी घटना

    हैरानी की बात यह है कि, इससे ठीक एक दिन पहले भी जिले में इसी समस्या के चलते एक अन्य किसान ने आत्महत्या की कोशिश की थी। लगातार दो घटनाओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तत्काल पाली एसडीएम रोहित सिंह को राजस्व अमले की बैठक बुलाने के निर्देश दिए।

    प्रशासन की कार्रवाई

    हल्का पटवारी कामिनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। तहसीलदार और फड़ प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। प्रशासन ने कहा कि, रकबा कटौती और तकनीकी गड़बड़ी को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएंगे।

    क्यों जान दे रहे किसान?

    इस पूरे विवाद की जड़ ‘रकबा कटौती’ है। किसानों के अनुसार, पोर्टल पर उनकी खेती योग्य जमीन कम दिख रही है। इस वजह से वे अपनी पूरी फसल को सरकारी खरीद के माध्यम से नहीं बेच पा रहे। वृद्ध किसान बैसाखू की पीड़ा यह है कि, मेहनत से उगाई गई फसल को बेचने के लिए उसे तहसील दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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