कल से खरमास शुरू:जानिए खरमास में कौन से काम करें और किनसे बनाएं दूरी

धर्म डेस्क। खरमास हिंदू ज्योतिष में एक विशेष अवधि मानी जाती है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष 16 दिसंबर 2025 से शुरू होगा। ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं और बृहस्पति ग्रह (गुरु) की शुभता कम हो जाती है, तब से इस अवधि की शुरुआत होती है। सूर्य का तेज इस समय कम होने के कारण शुभ-मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
सूर्य ने 16 दिसंबर 2025 सुबह 4:19 बजे धनु राशि में प्रवेश करेगा। इस समय से ही खरमास का पुण्यकाल शुरू होगा। 16 दिसंबर की सुबह 4:30 बजे से 10:45 बजे तक का समय इस अवधि का शुभकाल माना जा रहा है। विशेष रूप से सुबह 4:30 बजे से 9:30 बजे तक का समय अत्यंत शुभ और लाभकारी है।
खरमास में क्या न करें
खरमास में कई प्रकार के कार्य वर्जित होते हैं। इन निषिद्धताओं का कारण ज्योतिषीय प्रभाव हैं। सूर्य का तेज कम और बृहस्पति की शुभता घट जाने से इस समय में शुभ-मांगलिक कार्य करने से घर परिवार में अशांति, मानसिक तनाव और नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
इस दौरान वर्जित कार्य-
- विवाह और सगाई: इस समय कोई भी विवाह या सगाई आयोजित नहीं करनी चाहिए।
- गृह प्रवेश और घर निर्माण: नए घर में प्रवेश या निर्माण के शुभ कार्य टालने चाहिए।
- मुंडन और यज्ञोपवीत: बच्चों के मुंडन और यज्ञोपवीत संस्कार नहीं कराए जाते।
- वधू प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य: वधू प्रवेश, कुआं, तालाब, बावड़ी या उद्यान निर्माण के कार्य वर्जित हैं।
- नए वाहन या संपत्ति की खरीदारी: खरमास में नई संपत्ति, वाहन या घर खरीदने से बचना चाहिए।
- मांस और मदिरा का सेवन: इस दौरान मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित है।
- वाद-विवाद और झगड़े: शांति बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें।
महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति मदद मांगने आए, तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। दान और जरूरतमंदों की सहायता इस समय पुण्य का कार्य मानी जाती है।
खरमास में क्या करें
खरमास का महीना केवल निषिद्धताओं का नहीं है, बल्कि पुण्य कर्म और धार्मिक गतिविधियों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
इस अवधि में किए जाने वाले शुभ कार्य:
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ: रामायण, भगवद गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ शुभ है।
- सूर्यदेव की पूजा: सूर्यदेव की उपासना करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- भगवान शिव और विष्णु की पूजा: शिव और विष्णु की आराधना से जीवन की परेशानियां कम होती हैं।
- दान और हवन: जरूरतमंदों को दान देना और हवन करना पुण्य के कामों में शामिल हैं।
खरमास में मांगलिक कार्यों की मनाही के बावजूद, वस्त्र, आभूषण, खाद्य सामग्री आदि की खरीदारी करने में कोई हर्ज नहीं है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं और बृहस्पति ग्रह की शुभता कम हो जाती है, तब से खरमास की अवधि शुरू होती है। सूर्य का तेज कम होने के कारण इस समय में शुभ-मांगलिक कार्य निषिद्ध माने जाते हैं।
खरमास की अवधि इस साल 15 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक रहेगी। मकर संक्रांति के दिन यानी 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इस अवधि में केवल धार्मिक, दान और पूजा संबंधी कार्य करना शुभ माना गया है।
खरमास में विशेष सावधानियां
- सकारात्मक सोच अपनाएं: इस अवधि में मानसिक और आध्यात्मिक ध्यान बढ़ाने का अवसर मिलता है।
- दान और सेवा करें: जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
- शुद्ध आहार का सेवन करें: मांसाहार और मदिरा से परहेज करने से स्वास्थ्य और ऊर्जा बनी रहती है।
- सूर्य देव की आराधना: प्रतिदिन सूर्यदेव की पूजा करने से घर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- मांगलिक कार्य स्थगित करें: विवाह, गृह प्रवेश, सगाई और यज्ञोपवीत जैसे कार्यों को मकर संक्रांति के बाद करें।
खरमास का महीना सावधानी और पुण्य कर्म का समय है। इस दौरान शुभ-मांगलिक कार्य टालकर धार्मिक, आध्यात्मिक और दान संबंधी कार्य करने चाहिए।











