सुई या इंजेक्शन का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं। खासतौर पर तब, जब डॉक्टर इंजेक्शन भरकर सिरिंज से 1–2 बूंद दवा बाहर निकालते हैं। लेकिन इसका कारण डराने वाला नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा होता है।
दरअसल, डॉक्टर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि सिरिंज के अंदर मौजूद हवा के छोटे बुलबुले बाहर निकल जाएं। अगर ये हवा दवा के साथ शरीर में चली जाए, तो दिक्कत पैदा कर सकती है।
Healthline के अनुसार, अगर खून की नसों में हवा चली जाए तो उसे एयर एम्बोलिज्म कहा जाता है। हवा का बड़ा बुलबुला हार्ट, फेफड़ों या दिमाग तक जाने वाली रक्त आपूर्ति को रोक सकता है, जिससे ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इंजेक्शन से अगर थोड़ी-सी हवा चली भी जाए, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। छोटे बुलबुले अक्सर शरीर खुद ही सोख लेता है। ऐसे में कभी-कभी सिर्फ हल्का दर्द या सूजन हो सकती है।
Healthline के मुताबिक, अगर करीब 50–100 मिलीलीटर हवा सीधे ब्लड स्ट्रीम में चली जाए, तब खतरा बढ़ सकता है। सामान्य इंजेक्शन में इतनी हवा जाना लगभग नामुमकिन होता है।
Cleveland Clinic के अनुसार, अगर इंजेक्शन के बाद सांस फूलने लगे, चक्कर आए, सीने में दबाव महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। इसलिए इंजेक्शन के बाद कुछ देर तक अस्पताल या क्लीनिक में रुकने की सलाह दी जाती है।
डॉक्टरों का कहना है कि इंजेक्शन में बहुत थोड़ी हवा जाने से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन कभी भी खुद से इंजेक्शन लगाने की कोशिश न करें और हमेशा प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ से ही इंजेक्शन लगवाएं।