क्या है जंतर-मंतर?जहां कॉकरोच जनता पार्टी जमा रही डेरा, जानें पहला प्रदर्शन से लेकर इसे बनवाने की वजह

नई दिल्ली। पिछले कई दिनों से जंतर- मंतर शब्द अक्सर सुनने में आ रहा है। यहां कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। लेकिन आखिर ये जंतर मंतर जेन- जी की पसंद कैसे बना और क्यों यहां कई प्रदर्शन किए जाते हैं। यह दिल्ली के लाल किला, कुतुब मिनार जैसी ही एक ऐतिहासिक जगह है। जिसका नाता एक प्राचीन इतिहास से जुड़ा है।
दिल्ली के कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के बीच स्थित जंतर-मंतर आज भले ही विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के लिए जाना जाता हो, लेकिन इसकी पहचान सिर्फ इतनी नहीं है। यह भारत की वैज्ञानिक सोच, खगोलीय ज्ञान और ऐतिहासिक विरासत का एक अनोखा प्रतीक है। हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के कारण जंतर-मंतर फिर चर्चा में है, लेकिन इसके पीछे लगभग 300 साल पुराना इतिहास छिपा है।
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया निर्माण
जंतर-मंतर का निर्माण 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। उन्हें गणित, ज्योतिष और खगोल विज्ञान में गहरी रुचि थी। उस समय ग्रहों और नक्षत्रों की गणना में कई त्रुटियां सामने आ रही थीं। इन्हें दूर करने और समय की सटीक गणना के लिए जयसिंह ने देशभर में पांच वेधशालाएं बनवाईं। दिल्ली का जंतर-मंतर इनमें सबसे पहले निर्मित हुआ था।
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कब हुआ जंतर-मंतर पर पहला प्रदर्शन?
आज देश के सबसे बड़े प्रदर्शन स्थलों में गिने जाने वाले जंतर-मंतर पर पहला विरोध प्रदर्शन वर्ष 1993 में हुआ था। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के तत्कालीन अध्यक्ष आशीष सूद ने केंद्र सरकार के एक आदेश के खिलाफ यहां प्रदर्शन किया था।
कैसे बना आंदोलन का प्रमुख केंद्र?
संसद भवन के करीब होने के कारण जंतर-मंतर धीरे-धीरे विरोध-प्रदर्शनों का सबसे पसंदीदा स्थल बन गया। यहां छात्र, किसान, कर्मचारी, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक समूह अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करते रहे हैं।
1993 के बाद से जंतर-मंतर हजारों छोटे-बड़े आंदोलनों का केंद्र रहा है। अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, तमिलनाडु किसानों का प्रदर्शन, पहलवानों का धरना और कई छात्र आंदोलनों ने यहीं से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।
जंतर-मंतर नाम का क्या मतलब है?
'जंतर-मंतर' नाम संस्कृत के दो शब्दों से बना है।
- जंतर (यंत्र) का अर्थ है उपकरण या मशीन।
- मंतर (मंत्र) का अर्थ है गणना या परामर्श।
- यानी जंतर-मंतर का मतलब हुआ ऐसी जगह जहां वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से गणना की जाए। यहां बने विशाल ढांचे वास्तव में खगोलीय यंत्र हैं।
आखिर कैसे काम करते हैं ये विशाल यंत्र?
राजा जयसिंह ने धातु के छोटे उपकरणों के बजाय पत्थर और ईंटों से बड़े-बड़े यंत्र बनवाए ताकि मौसम और तापमान का असर उनकी सटीकता पर न पड़े। इसके जरिए समय की गणना, सूर्य की स्थिति ग्रहों और तारों की चाल, दिशा और खगोलीय घटनाएं जैसे अनेक जरूरी घटनाएं पर नजर रखी जाती थी। इसी वजह से जंतर-मंतर को प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का शानदार उदाहरण माना जाता है।
पांच शहरों में बनी थीं वेधशालाएं
दिल्ली के अलावा जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में भी जंतर-मंतर बनाए गए थे।
- जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा है।
- दिल्ली का जंतर-मंतर सबसे पहला था।
- कुछ वेधशालाएं समय के साथ नष्ट हो गईं।
- दिल्ली का जंतर-मंतर आज ASI द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है।
- कैसे बना देश का सबसे चर्चित प्रदर्शन स्थल?
- संसद भवन के नजदीक होने के कारण जंतर-मंतर धीरे-धीरे आंदोलनों का प्रमुख केंद्र बन गया।
1993 में यहां पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन दर्ज किया गया। इसके बाद यह जगह छात्रों, किसानों, कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों की आवाज उठाने का मंच बन गई।
जंतर- मंतर पर हुए बड़े आंदोलन
- अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन (2011)
- तमिलनाडु किसानों का प्रदर्शन (2017)
- पहलवानों का आंदोलन
- विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठन के प्रदर्शन
जनता की आवाज का गवाह बना जंतर- मंतर
जंतर-मंतर सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं है। यह भारत की वैज्ञानिक विरासत और लोकतांत्रिक परंपरा, दोनों का प्रतीक है। एक ओर यह 18वीं सदी के खगोलीय ज्ञान की कहानी कहता है, तो दूसरी ओर आधुनिक भारत में जनता की आवाज बनने वाले आंदोलनों का गवाह भी है।











