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त्योहार विशेषJanmashtami 2025 :जन्माष्टमी पर 190 साल बाद बना दुर्लभ योग, मिलेगा दीर्घायु और यश का आर्शीवाद; भूलकर भी न करें ये गलतियां

जन्माष्टमी 2025 इस बार बेहद खास होने वाली है। करीब 190 साल बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिव्य संयोग में व्रत और पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, संतान सुख, यश और मोक्ष का आशीर्वाद मिलेगा।
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जन्माष्टमी पर 190 साल बाद बना दुर्लभ योग, मिलेगा दीर्घायु और यश का आर्शीवाद; भूलकर भी न करें ये गलतियां
लड्डू गोपाल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    धर्म डेस्क। 16 अगस्त को पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मना रहा है। भाद्रपद मास की कृष्ण अष्टमी को द्वापर युग में मथुरा की जेल में आधी रात को भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था। इसीलिए हर साल रात 12 बजे लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है। 

    जन्माष्टमी 2025 पर दुर्लभ संयोग

    इस साल जन्माष्टमी पर 190 साल बाद अद्भुत ग्रहयोग बन रहे हैं। अमृत सिद्धि योग, गौरी योग, आदित्य योग, राजराजेश्वर योग और गजलक्ष्मी राजयोग  ये सभी मिलकर पर्व को और भी खास बना रहे हैं। ऐसा संयोग इससे पहले 1835 में बना था। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा और व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    अष्टमी तिथि प्रारंभ - 15 अगस्त रात 11:49 बजे

    अष्टमी तिथि समाप्त - 16 अगस्त रात 9:34 बजे

    गृहस्थ जन्माष्टमी - 15 अगस्त

    वैष्णव जन्माष्टमी - 16 अगस्त

    कन्हैया के जन्म की पूजा का मुहूर्त - रात 12:45 से 1:26 बजे तक

    ऐसे करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार

    लड्डू गोपाल को पीले या केसरिया वस्त्र पहनाएं  ये रंग आनंद और पवित्रता का प्रतीक हैं। माथे पर गोपी चंदन का तिलक लगाएं और चंदन की खुशबू से श्रृंगार करें। गहरे या काले रंगों का प्रयोग न करें। तुलसी की माला और कमल के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ है।

    जन्माष्टमी व्रत के नियम

    ब्रह्म मुहूर्त में उठकर संकल्प लें और ब्रह्मचर्य का पालन करें, दिन में न सोएं, अन्न व नमक का सेवन न करें, केवल फल, दूध, दही, कुट्टू, साबूदाना आदि लें, रात 12 बजे भगवान को भोग लगाने के बाद ही व्रत खोलें, पहले गरीबों को दान दें, फिर प्रसाद से व्रत पारण करें।

    पहली बार व्रत रख रहे हैं तो रखें ध्यान

    अन्न का सेवन न करें, चाहे तो फलाहार कर सकते हैं। मन को शांत और पवित्र रखें, किसी से झगड़ा न करें। घर के मंदिर को साफ-सजाकर भगवान को नए वस्त्र पहनाएं। व्रत खोलने से पहले दान अवश्य करें।

    जन्माष्टमी व्रत का महत्व

    जन्माष्टमी के पावन दिन रखा गया व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मिक शांति के लिए भी खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन यदि भक्त पूरे भाव से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें, तो उनके मन से हर तरह की अशांति दूर हो जाती है और जीवन में ऐश्वर्य, यश, दीर्घायु, संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। खासकर, जो श्रद्धापूर्वक लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं, उन पर भगवान विशेष कृपा बरसाते हैं और संतान सुख का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। 

    इस जन्माष्टमी पर भक्ति और श्रद्धा के साथ व्रत करने से भगवान श्रीकृष्ण की असीम कृपा प्राप्त होगी और जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलेंगे।

    People's Reporter
    By People's Reporter
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