UN में बोला अमेरिका :ईरान के तेवर ठंडे पड़े, होर्मुज में जबरन जहाजों की नाकाबंदी कर रहा, भारत सहित 113 देशों ने किया समर्थन

न्यूयॉर्क। अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर ईरान और अमेरिका आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ईरान अपनी हरकतों की वजह से दुनिया में धीरे-धीरे अलग-थलग पड़ता जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में गैरकानूनी गतिविधियां कर रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।
113 देश समर्थन में आए
माइक वाल्ट्ज़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि भारत, जापान और दक्षिण कोरिया सहित 113 देशों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान की गतिविधियां केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं। हालांकि ट्रंप भी होर्मुज मुद्दे को लेकर काफी सख्ता है।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है तो उसका सीधा असर दुनिया भर में तेल की कीमतों, व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका समेत कई देश इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं।
अब तक क्या-क्या हुआ?
- अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य गतिविधियों का विरोध करता रहा है।
- पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव बेहद बढ़ गया था।
- पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध का खतरा भी पैदा हो गया था।
- अप्रैल 2026 में दोनों देशों के बीच अस्थायी सीजफायर लागू किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में इस युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया। हालांकि अमेरिका ने ईरान पर राजनीतिक और सैन्य दबाव बनाए रखना जारी रखा।दूसरी तरफ ईरान ने चेतावनी दी कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ तो वह कड़ा जवाब देगा।
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फिलहाल लागू है सीजफायर
ऐसे में दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है। अमेरिका ईरान को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने वाला देश बता रहा है, जबकि ईरान खुद को अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाने वाला राष्ट्र कह रहा है।
ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।











