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पशु वध पर बंगाल सरकार सख्त :बिना सर्टिफिकेट नहीं कटेगी गाय-भैंस, सार्वजनिक बूचड़खाने भी बंद; नियम तोड़ने पर होगी जेल

पश्चिम बंगाल सरकार ने पशु वध को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट गाय-भैंस काटने पर रोक लगा दी गई है। खुले में पशु वध पूरी तरह बैन रहेगा। नियम तोड़ने पर 6 महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
बिना सर्टिफिकेट नहीं कटेगी गाय-भैंस, सार्वजनिक बूचड़खाने भी बंद; नियम तोड़ने पर होगी जेल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई BJP सरकार ने पशु वध को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राज्य सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ को कड़ाई से लागू करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इसके तहत अब बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय, बैल, बछड़ा और भैंस समेत किसी भी मवेशी का वध नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि, खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियम तोड़ने वालों पर 6 महीने तक की जेल और 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार का एक्शन

राज्य सरकार ने यह फैसला 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश और 2022 की गाइडलाइंस के आधार पर लिया है। नई अधिसूचना में कहा गया है कि अब पशु वध से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी। सरकार का कहना है कि, यह कदम सार्वजनिक स्वच्छता, कानून व्यवस्था और पशु क्रूरता रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

बिना फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होगा वध

नई गाइडलाइंस के मुताबिक, गाय, बैल, बछड़ा, भैंस और भैंस के बच्चों समेत किसी भी पशु को काटने से पहले आधिकारिक फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। यह प्रमाण पत्र नगरपालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति और सरकारी पशु चिकित्सक की संयुक्त सहमति से जारी किया जाएगा।

सर्टिफिकेट तभी मिलेगा जब-

  • पशु की उम्र 14 साल से ज्यादा हो।
  • वह काम करने या प्रजनन के योग्य न हो।
  • गंभीर चोट, विकृति या असाध्य बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया हो।

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खुले में पशु वध पर पूरी तरह रोक

सरकार ने सार्वजनिक जगहों, सड़कों और खुले इलाकों में पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। नई अधिसूचना के अनुसार, जिन पशुओं के लिए वध की अनुमति दी जाएगी, उन्हें केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नगरपालिका बूचड़खानों या प्रशासन द्वारा तय स्थानों पर ही काटा जा सकेगा। अवैध बूचड़खानों और खुले में होने वाले पशु वध पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माना

सरकार ने अधिसूचना में दंड का भी स्पष्ट प्रावधान रखा है। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ 6 महीने तक की जेल, 1000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों कार्रवाई एक साथ हो सकती हैं। इसके अलावा अधिनियम के तहत दर्ज सभी मामले संज्ञेय अपराध माने जाएंगे।

सर्टिफिकेट न मिलने पर अपील का अधिकार

अगर किसी व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया जाता है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है। सरकार ने कहा है कि, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से लागू की जाएगी।

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क्या है 1950 का कानून?

‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ राज्य का करीब 75 साल पुराना कानून है। इसका उद्देश्य पशुओं के वध को नियंत्रित करना था, न कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। इस कानून के तहत पहले भी बिना सरकारी प्रमाण पत्र के गाय, बैल, बछड़ा और भैंस का वध प्रतिबंधित था। हालांकि अब नई सरकार ने इसे और सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है।

बकरीद से पहले फैसले के राजनीतिक मायने

यह फैसला ऐसे समय आया है जब बकरीद नजदीक है। ऐसे में इस अधिसूचना को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई BJP सरकार लगातार कई बड़े फैसले ले रही है। सरकार का दावा है कि राज्य में अब कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। 

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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