इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच घोषित 14-15 दिन के अस्थायी सीजफायर ने दुनिया को राहत तो दी है, लेकिन इसके साथ ही एक नई राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान इस सीजफायर को अपनी कूटनीतिक सफलता बता रहा है। वहां की मीडिया और राजनीतिक हलकों में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग तक उठने लगी है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तंज और बहस भी तेज हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि, अमेरिका और ईरान के बीच 15 दिनों के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अपील के बाद लिया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि, चीन ने ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए राजी किया, जिसके बाद यह अस्थायी सीजफायर संभव हो सका।
हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि, अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और यदि हालात बिगड़ते हैं तो सैन्य विकल्प खुले रहेंगे। इससे साफ है कि यह सीजफायर अभी बेहद नाजुक स्थिति में है।
सीजफायर की घोषणा के बाद पाकिस्तान में इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर पेश किया जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में लगातार यह दावा किया जा रहा है कि इस्लामाबाद की मध्यस्थता ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बड़े युद्ध को टाल दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद स्थापित कराने में एक भरोसेमंद चैनल की तरह काम किया। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी पहल ने तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई और इससे वैश्विक तेल आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ने वाले संभावित संकट को भी रोका जा सका।
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पाकिस्तान के कई टीवी चैनलों पर इस मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिल रही है। एक प्रमुख चैनल पर हुई डिबेट के दौरान पैनलिस्टों ने खुलकर कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए।
एक पैनलिस्ट ने कहा कि, जो काम पाकिस्तान के नेतृत्व ने किया है, उसके बाद दुनिया को उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार देना चाहिए। आज दुनिया में अगर किसी ने युद्ध को टालने में बड़ी भूमिका निभाई है तो वह पाकिस्तान का नेतृत्व है। डिबेट में यह भी कहा गया कि, दुनिया के नेताओं को आगे आकर इन दोनों नेताओं का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित करना चाहिए।
पाकिस्तान में जहां एक ओर इस मुद्दे को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर कई लोग इसका मजाक भी उड़ा रहे हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय टिप्पणीकारों ने पाकिस्तान की इस मांग को अतिशयोक्ति बताया है।
ब्रिटेन के पत्रकार टोमी रॉबिनसन ने एक ट्वीट के जवाब में तंज करते हुए लिखा कि पाकिस्तान पर भरोसा करना मुश्किल है क्योंकि वहां कभी ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को भी पनाह मिली थी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने का न्योता भी दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि, इस्लामाबाद टॉक्स के जरिए स्थायी शांति की दिशा में ठोस प्रगति हो सकती है और आने वाले दिनों में सकारात्मक खबरें मिल सकती हैं।
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हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों की भी भूमिका बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार तुर्की, मिस्र और चीन ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद की है। वहीं सऊदी अरब और कतर जैसे देशों ने भी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया।
अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और दोनों पक्षों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बड़े युद्ध का खतरा नजर आने लगा था। इसके बाद कई देशों ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए और अंततः अस्थायी सीजफायर की घोषणा हुई।
हालांकि यह सीजफायर अभी पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा है। यह केवल अस्थायी व्यवस्था है और किसी भी समय हालात बदल सकते हैं। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है। यही वजह है कि दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ इस सीजफायर को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।
हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय नेताओं और विश्लेषकों ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना भी की है। स्कॉटलैंड के पूर्व मंत्री हमजा यूसुफ ने कहा कि पाकिस्तान ने इस संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उसके प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह संकेत है कि, वैश्विक कूटनीति का केंद्र धीरे-धीरे यूरोप से हटकर एशिया की ओर बढ़ रहा है।