भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने सख्ती की है। उन्होंने इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया है। दिलीप कुमार यादव को मंत्रालय पदस्थ करने के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं, एडिशनल कमिश्नर (अपर आयुक्त) रोहित सिसोनिया को सस्पेंड कर दिया गया है।। इसके साथ ही प्रभारी अधीक्षण यंत्री पीएचई (एसई) संजीव श्रीवास्तव को भी सस्पेंड किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस मामले में SOP (Standard Operating Procedure) जारी कर दी गई है। विभाग के एसीएस संजय दुबे ने सभी नगर निगम के आयुक्तों और नगर पालिका व नगर परिषद के सीएमओ को निर्देश दिए हैं।
• शहर में बिछाई गई जल वितरण प्रणाली (Distribution Network) का 07 दिवस में सर्वे किया जाकर ऐसे क्षेत्र जहॉं पर सघन आबादी अथवा 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाइपलाइन बिछी हुई हैं, इनका चिन्हांकन किया जाए।
• पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाइपलाइन, नालियों/सीवर पाइपलाइन के समीप अथवा नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइनों का चिन्हांकन किया जाए।
• चिन्हांकन में पाए गए रिसाव का 48 घंटे के भीतर मरम्मत सुनिश्चित किया जाए।
• जल शोधन संयंत्र (WTP) तथा उच्च स्तरीय टंकियां (OHT's)/ Sump Tanks की साफ-सफाई का 07 दिवस के अंदर निरीक्षण किया जाए।
• सभी जल शोधन संयंत्रों (WTP's), प्रमुख जल स्रोतों तथा उच्च स्तरीय टंकियों (OHT's)/ Sump Tanks पर तत्काल जल नमूना परीक्षण कराया जाए।
• जहां पर भी E-Coli/Coliform अथवा BIS IS:10500 2012 के मानक अनुसार अनुमेय सीमा से अधिक प्रदूषण पाया जाता है, वहां तत्काल जल आपूर्ति रोकी जाए एवं वैकल्पिक सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
• Chlorination system की 24x7 निगरानी की जाए तथा उच्च स्तरीय टंकियों (OHT's)/ Sump Tanks एवं हर वार्ड/District Metering Area's (DMA's) में संचालन-संधारण के अमले/ अमृत मित्र/सफाई मित्र के माध्यम से Random Sampling की जाकर जल की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाए।
• चयनित Household's Training पर Residual Chlorine हेतु Random Sampling की जाये। Residual Chlorine की मात्रा 0.2 PPM से कम एवं 1 PPM से अधिक नहीं होनी चाहिए।
• Residual Chlorine की मात्रा कम पाए जाने पर WTP/OHT's पर Chlorine की Boosting की जाए।
• नगरीय क्षेत्र में जल के अन्य स्रोतों (कुएं, बावड़ी, तालाब तथा नलकूपों) में Bleaching Powder की Dosing निर्धारित मानकों के अनुरूप की जाए।
• जल शोधन संयंत्रों एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में पर्याप्त मात्रा में आवश्यक रसायन (Chemical) एवं उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
• संभाग स्तर पर प्रदाय की गई मोबाइल लैब में जल गुणवत्ता के परीक्षण हेतु Field Test Kit (FTK) का प्रावधान सुनिश्चित किया जाये। जिसमें जीवाणु परीक्षण भी किया जाएगा।
• नगरीय निकायों में जल शोधन संयंत्रों पर स्थापित लैब/ मोबाइल लैब/ NABL अधिकृत Laboratories/ पीएचई द्वारा स्थापित लैब से एकत्र किए गए Water Samples का परीक्षण IS मानक अनुसार निर्धारित अंतराल पर कराया जाए।
• जल गुणवत्ता के मानक IS:10500 2012 (RA 2023) अनुसार होने चाहिए।
• सभी नगरीय निकायों में Pipeline Leakage Detection हेतु जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।
• नगरीय निकायों में Ward/DMA wise, Communication Plan तैयार किया जाये, जिसमें निकाय के आयुक्त/सीएमओ, जल प्रदाय शाखा के प्रभारी अभियंता, Supervisor, Valve man, Pump attendant के दूरभाष/मोबाइल नंबर की जानकारी हो, जिसे विभाग/निकाय की Website, कार्यालयों के सूचना पटल एवं महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित किया जाए।
• जल प्रदाय व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु Ward/DMA wise जलप्रदाय शाखा के प्रभारी अभियंता की व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए।
• हर Ward/DMA की Daily water safety report तैयार कर आयुक्त/ सीएमओ को प्रस्तुत किया जाए।
• सभी नगरीय निकायों द्वारा जल गुणवत्ता एवं जल जनित बीमारियों के संबंध में जनप्रतिनिधियों के समन्वय के साथ स्थानीय स्तर पर आम नागरिकों हेतु Advisory जारी की जाए।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सरकार ने 15 पेज की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें आधिकारिक तौर पर कहा गया कि दूषित पानी से 4 लोगों की मौत हुई है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से 35 मरीज आईसीयू में हैं।
यह मामला इंदौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रितेश इनानी की जनहित याचिका पर सुना गया। याचिकाकर्ता ने सरकार की रिपोर्ट को जल्दबाजी में तैयार बताया।
हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है। सरकार की ओर से फिलहाल चार मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है, जबकि अन्य मौतों को लेकर जांच जारी है।
एक हस्तक्षेपकर्ता ने कोर्ट से इस मुद्दे पर मीडिया रिपोर्टिंग रोकने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।