Indonesia Earthquake : भूकंप के तेज झटकों से कांपा इंडोनेशिया, 6.1 रही तीव्रता; सुनामी का खतरा नहीं

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Indonesia Earthquake : भूकंप के तेज झटकों से कांपा इंडोनेशिया, 6.1 रही तीव्रता; सुनामी का खतरा नहीं
जकार्ता। इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के पास भूकंप के झटके महसूस किए गए। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 6:55 बजे समुद्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। भूकंप की तीव्रता 6.1 रही और इसका केंद्र उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तट के पास था। अचानक आए तेज झटकों से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल किसी तरह के नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।

इंडोनेशिया में आते रहते हैं भूकंप

इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ फायर" पर स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की टकराहट से लगातार भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। यह इलाका दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है।

भूकंप आने की प्रमुख वजहें

  • इंडोनेशिया कई टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है, जिससे भूकंप की घटनाएं आम हैं।
  • प्रशांत, यूरेशियन, और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेटों के बीच घर्षण और टकराव से अक्सर तेज झटके महसूस किए जाते हैं।
  • समुद्र के अंदर भूकंप आने से कई बार सुनामी का खतरा भी बढ़ जाता है।

पिछले वर्षों में आए विनाशकारी भूकंप

जनवरी 2021: सुलावेसी में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया। 100 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग बेघर हो गए। साल 2018: सुलावेसी के पालु में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के बाद आई सुनामी में 2,200 से अधिक लोगों की मौत हुई। साल 2004: आचे प्रांत में 9.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इस भूकंप से आई सुनामी में इंडोनेशिया में 1.7 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई।

क्या होता है रिक्टर स्केल?

भूकंप की तीव्रता नापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। रिक्टर स्केल मूल रूप से भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए डिजाइन किया गया था। इसकी खोज अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्सा रिक्टेर और बेनो गुटरबर्ग ने 1935 में की थी। उनका सोचना था कि, भूकंप की तीव्रता को एक संख्या में व्यक्त किया जाना चाहिए ताकि इसकी तुलना अन्य भूकंपों से की जा सके।

आखिर क्यों आते हैं भूकंप ?

भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।

कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।

किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है

• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है। • वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है। • 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो। • 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं। • 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है। • 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है। • 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में पाइप फट जाती है। • 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी। • 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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