MP News :मुरैना में घड़ियालों के बच्चों की लोकेशन मिली मगरमच्छों के पेट में!

चंबल सेंक्चुरी में घड़ियालों की संख्या बढ़ने की गति धीमी होने के संबंध में ट्रांसमीटरों से नया खुलासा हुआ है। पड़ताल में पता चला है कि घड़ियालों के बच्चों को मगरमच्छ शिकार बना रहे हैं। इससे घड़ियालों के अस्तित्व का संकट खड़ा हो रहा है।
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मुरैना में घड़ियालों के बच्चों की लोकेशन मिली मगरमच्छों के पेट में!
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मुरैना/नई दिल्ली। मुरैना जिले में चंबल नदी पर बने चंबल सेंक्चुरी क्षेत्र में घड़ियालों के कई बच्चों की लोकेशन मगरमच्छों के पेट के अंदर मिलने के बाद मगरमच्छों द्वारा उनका शिकार किए जाने के खुलासे ने विशेषज्ञों की बैचेनी बढ़ा दी है। घड़ियालों के बच्चों को इस क्षेत्र में ट्रांसमीटर लगा कर छोड़ा गया था, जिससे इसका खुलासा हो सका कि मगरमच्छों ने घड़ियालों के बच्चों को अपना शिकार बना लिया है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिस चंबल नदी को देश में घड़ियालों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, वहीं अब उनके बच्चों की जान खतरे में हैं। 

    ट्रांसमीटर से हुई पुष्टि

    चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी के अभी हाल ही में निगरानी सर्वे में खुलासा हुआ है कि तीन साल तक के 120 सेंटीमीटर लंबे घड़ियाल लगातार मगरमच्छों के हमले का शिकार हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार वन विभाग की गो एंड रिलीज योजना के तहत घड़ियालों पर लगाए गए रेडियो ट्रांसमीटर से इसकी पुष्टि हुई है।

    लोकेशन से पकड़ा गया मामला

    ट्रांसमीटर सही सलामत मिले, लेकिन उनकी लोकेशन नदी में नहीं, बल्कि मगरमच्छों के पेट से ट्रेस हुई। बताया गया है कि जब जांच आगे बढ़ी तो मगरमच्छों के मल से घड़ियालों के अवशेष मिलने से इसकी स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई। सूत्रों ने बताया कि चंबल सेंक्चुरी में पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है। जानकारी में बताया गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों सहित जलीय जीव विशेषज्ञ की टीम अब यह पता लगाने के प्रयास में लगी है कि आखिर घड़ियालों का सबसे सुरक्षित स्थान कैसे उनकी शिकारगाह बनता जा रहा है।

    सबसे अनुकूल थी चंबल नदी

    कहा गया है कि देश में घड़ियालों के सुरक्षित सरंक्षण के लिए जब नदियों का अध्ययन किया गया तो चंबल नदी को सबसे स्वच्छ और अनुकूल पाया गया।  साफ पानी और उपयुक्त, प्राकृतिक वातावरण में ही घड़ियाल बेहतर तरीके से जीवित रह पाते हैं। इसी आधार पर 1978 और 79 में मुरैना जिले के देवरी गांव के समीप देवरी घड़ियाल सेंक्चुरी की स्थापना की गई। वन विभाग सूत्रों के अनुसार 2025 की गणना के अनुसार सेंक्चुरी में घड़ियालों की संख्या बढ़कर दो हजार 462 तक पहुंच गई जबकि सेंक्चुरी की स्थापना बाद 1978-79 में नदी में मात्र 75 घड़ियाल छोड़े गए थे।

    सात साल पहले से शिकार की जानकारी

    इसके अलावा वयस्क मगरमच्छ तीन साल तक के घड़ियालों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस बात का खुलासा MCBT (मद्रास कोको डायल बैंक ट्रस्ट) की रिपोर्ट में भी हुआ है। सूत्रों के अनुसार चंबल नदी के घड़ियालों पर मगरमच्छ हमले ओर शिकार की जानकारी वन विभाग को करीब आठ साल पहले ही वर्ष 2017-18 में हीं मिल चुकी थी लेकिन इसे लंबे समय तक दबाए रखा गया। अब जब घड़ियालों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आने लगीं तो हाल ही में देवरी घड़ियाल सेंक्चुरी में पहला मामला दर्ज किया गया।

    3% बच्चे ही जीवित रह पाते हैं

    विशेषज्ञ के मुताबिक चंबल सेंक्चुरी में घड़ियालों की संख्या जिस अनुपात में बढ़नी चाहिए थी वह नहीं बढ़ सकी। इसकी वजह बाढ़ के दौरान घड़ियालों के सिर्फ 3% बच्चे ही जीवित रह पाते हैं और  मगरमच्छ 3 साल तक के घड़ियालों को शिकार बना रहे हैं।

    फैक्ट फाइल

    • 1978 और 79 में मुरैना जिले के देवरी गांव के समीप देवरी घड़ियाल सेंचुरी की स्थापना की गई
    • 75 घड़ियाल छोड़े गए थे इस सेंक्चुरी में स्थापना के समय
    • 2462 है घड़ियालों की संख्या सेंक्चुरी में 2025 की गणना के अनुसार
    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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