धार। मध्य प्रदेश की धार भोजशाला लंबे समय से विवादों में चल रही है। अब तक यह मामला अपने अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंचा है। सोमवार को मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खण्डपीठ में होनी थी। लेकिन फिलहाल यह टाल दी गई है। इंदौर हाईकोर्ट के प्रवक्ता श्रीश दुबे के मुताबिक, यह सर्वे केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। लेकिन अधिवक्ता संघ की हड़ताल के चलते आज की सुनवाई नहीं हो सकी।
इस वजह से मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई गई है। अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। जहां इस मामले में ASI द्वारा तैयार की गई 98 पेज की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाएगी। यह पहला मौका है जब यह रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक कराई जाएगी। इसका कारण दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के साथ हिंदू और मुस्लिम पक्ष को रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध करना है।
यह अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में चल रही है। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ कर रही है। मामला ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़ा होने के कारण कोर्ट की हर टिप्पणी को बेहद अहम माना जा रहा है।
माना जा रहा है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला के वास्तविक स्वरूप और उसके धार्मिक उपयोग से जुड़े विवादों पर आगे की दिशा तय हो सकती है। यही वजह है कि इस सुनवाई को ऐतिहासिक माना जा रहा है और धार सहित पूरे मध्य प्रदेश में इसे लेकर उत्सुकता और तनावपूर्ण निगाहें बनी हुई हैं। कोर्ट के फैसले से न सिर्फ भोजशाला का भविष्य तय हो सकता है, बल्कि इससे जुड़े कानूनी और सामाजिक प्रभाव भी दूरगामी माने जा रहे हैं।