मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हुआ, लेकिन पहले ही दिन सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। सत्र की शुरुआत संपूर्ण छह छंदों में वंदे मातरम् के गायन से हुई। इसके बाद मंगु भाई पटेल ने सदन को संबोधित किया।
राज्यपाल जैसे ही अपना अभिभाषण पढ़ने लगे, विपक्ष ने बीच-बीच में आपत्ति जतानी शुरू कर दी। हंगामे के कारण सदन का माहौल गरमा गया, लेकिन इसके बावजूद राज्यपाल ने अपना भाषण जारी रखा। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही अंततः अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि देश उस दौर में प्रवेश कर चुका है, जिसे नरेंद्र मोदी ने अमृत काल कहा है। उन्होंने सरकार की कई उपलब्धियों और योजनाओं का जिक्र किया, जिनमें शामिल हैं-
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए आरोप लगाया कि नल-जल योजना की खामियों, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का जिक्र राज्यपाल के भाषण में नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी।
राज्यपाल के सदन से जाने के बाद कार्यवाही फिर शुरू हुई। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो हिस्सा अभिभाषण में पढ़ा नहीं जा सका, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। सत्र के दौरान कुल 3478 प्रश्न लगाए गए हैं, 236 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प पेश किए जाएंगे, शून्य काल में 83 प्रश्न रखे जाएंगे।
सत्र से पहले विधानसभा पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यपाल का स्वागत किया।
मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से किसी भी किसान को बाहर नहीं किया गया है। वहीं, कांग्रेस विधायक सुजीत सिंह चौधरी ने आरोप लगाया कि 1.60 लाख किसानों को योजना से बाहर कर दिया गया है और किसानों को मिलने वाली राशि “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी है।