भोपाल। राजधानी के मिन्टो हॉल (कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर) में रविवार को आयोजित कार्यक्रम ‘Healing for World Peace’ ने इतिहास रच दिया। इस आयोजन में 1,000 से अधिक हीलर ऑफलाइन और 1,500 से अधिक लोग ऑनलाइन जुड़कर विश्व शांति के लिए सामूहिक हीलिंग में सहभागी बने। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश फैलाना था। मंत्र जाप और संयुक्त साउंड हीलिंग के सत्रों ने पूरे हॉल को आध्यात्मिक ऊर्जा और सौहार्द से भर दिया।

कार्यक्रम की गरिमा में विशेष वृद्धि हुई परम पूज्य श्री नीम करौली बाबा जी के पौत्र की उपस्थिति से। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसने शांति और सामूहिक चेतना के संदेश को आध्यात्मिक दृष्टि से मजबूत किया। समारोह का शुभारंभ अतिथियों और सहयोगियों के स्वागत के साथ हुआ।
इस अवसर पर पर्यटन और संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला, उद्योगपति दिलीप सूर्यवंशी (मैनेजिंग डायरेक्टर, दिलीप बिल्डकॉन), दिलीप बिल्डकॉन के प्रबंध निदेशक और CEO देवेंद्र जैन, संजीव अग्रवाल (सीएमडी, सेज ग्रुप), दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल के प्रतिनिधि, बॉलीवुड निर्देशक राकेश रोशन, गायक ब्रिजेश शांडिल्य, अभिनेता बलराज स्याल, रेवा कुरसे सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘दीप प्रज्वलन’ की संयुक्त विधि से हुई, जिससे एकता और सहयोग का संदेश सामने आया। इसके बाद ‘हनुमान चालीसा’ का सामूहिक जाप हुआ, जिसने पूरे वातावरण को दिव्यता और उपचार की ऊर्जा से भर दिया। आयोजन की केन्द्रीय थीम वैश्विक पहल थी, जो विश्व को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त कर स्थाई शांति की ओर अग्रसर करने के लिए समर्पित है। अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ आरविका गुप्ता ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए सत्र में योग और ऊर्जा संतुलन का महत्व समझाया।
समापन के दौरान 100 से अधिक हीलर्स ने सामूहिक संकल्प के साथ साउंड हीलिंग की। इस सत्र ने आशा, एकता और सार्वभौमिक कल्याण का संदेश दूर-दूर तक फैलाया। इस ऐतिहासिक अवसर पर घोषणा की गई कि 5 अक्टूबर को हर साल ‘विश्व हीलिंग दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिससे शांति की यह भावना स्थाई वैश्विक परंपरा बन सके।
आयुष गुप्ता ने कहा कि ‘Healing for World Peace’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक आंदोलन है। उन्होंने बताया कि जब हजारों हीलर्स और शांति समर्थक एकात्मता के साथ अपनी ऊर्जा समर्पित करते हैं, तो विश्व के लिए सकारात्मक कंपन पैदा होते हैं। यह ऐतिहासिक प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।