बैंकॉक/नोम पेन्ह। दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देशों थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद ने गुरुवार को हिंसक रूप ले लिया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई गोलीबारी में 9 थाई नागरिकों की मौत हो गई जबकि 14 अन्य घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए और सीमा पर एफ-16 लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए थाई सरकार ने सीमा से सटे हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
गुरुवार सुबह थाईलैंड के सुरिन प्रांत और कंबोडिया के प्राचीन प्रसात ता मुएन थॉम मंदिर के पास गोलीबारी शुरू हुई। थाई सेना के अनुसार, कंबोडिया ने पहले एक ड्रोन भेजा और फिर तोपों और लंबी दूरी के BM21 रॉकेटों से हमला कर दिया। इस हमले में 9 थाई नागरिकों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। जवाब में थाईलैंड ने अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों को तैनात कर कंबोडिया के कुछ सैन्य ठिकानों पर बमबारी की।
थाई सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, “यह कार्रवाई थाई नागरिकों की रक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता को बनाए रखने के लिए की गई है।”
वहीं, थाई सरकार ने बयान जारी कर बताया कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
कंबोडिया ने थाईलैंड के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि गोलीबारी की शुरुआत थाई सैनिकों ने की। कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि थाई सेना ने पहले सीमा पर हमला किया, जिसके जवाब में हमारे सैनिकों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की।
पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “थाईलैंड की सेना ने ओद्दार मीन्चे और प्रीह विहियर प्रांतों पर गोलाबारी की। हमारे सैनिकों के पास जवाबी हमले के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जनता से शांति बनाए रखने की अपील है।”
थाईलैंड ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सीमा से लगे 86 गांवों से लगभग 40 हजार नागरिकों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। थाईलैंड की सीमा सुरक्षा एजेंसियों ने सभी सीमाओं को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नोम पेन्ह स्थित रॉयल थाईलैंड दूतावास ने भी थाई नागरिकों से जल्द से जल्द कंबोडिया छोड़ने की अपील की है। दूतावास के अनुसार, “सीमा पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और झड़पें लंबे समय तक जारी रह सकती हैं।”