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नोबेल प्राइज नहीं मिला होता तो भी मैं नहीं सोचता कि जीवन व्यर्थ हो गया : अमर्त्य सेन

नोबेल प्राइज नहीं मिला होता तो भी मैं नहीं सोचता कि जीवन व्यर्थ हो गया : अमर्त्य सेन

बोलपुर (पश्चिम बंगाल)। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन का मानना है कि नोबेल पुरस्कार पाने के अलावा जीवन में कई और बड़े लक्ष्य होते हैं। उन्होंने पुरस्कार को अपने पास एक अच्छी चीज बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें यह न मिला होता तो भी वह नहीं मानते कि उनका जीवन व्यर्थ हो गया। पुरस्कार के साथ उन्हें जो राशि मिली थी, उसे उन्होंने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया।

बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य के लिए लगाया पुरस्कार का पैसा

सेन ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर में अपने पैतृक आवास पर कहा, मुझे कुछ पैसा मिला और मैं बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य से जुड़ी प्रतिची ट्रस्ट नामक संस्था की स्थापना कर पाया। उन्होंने कहा, आपको पुरस्कार मिलने या न मिलने में भाग्य की भी भूमिका होती है। मुझे नहीं लगता कि मेरा लक्ष्य नोबेल या कोई अन्य पुरस्कार प्राप्त करना था। उन्होंने ट्रस्ट की वेबसाइट पर लिखा है, जब मुझे नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया, तो इसने मुझे विशेष रूप से भारत और बांग्लादेश में साक्षरता, बुनियादी स्वास्थ्य सेवा और लैंगिक समानता समेत पुराने मुद्दों के बारे में कुछ करने का मौका दिया। मैंने पुरस्कार राशि के कुछ हिस्से की मदद से ट्रस्ट स्थापित की, जो निश्चित रूप से इन समस्याओं के समाधान के लिए एक छोटा सा प्रयास है।

People's Reporter
By People's Reporter

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