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Europe Heatwave:यूरोप में भीषण गर्मी, 42 डिग्री पहुंचा तापमान; 40 लोगों की डूबने से मौत, स्कूल बंद

जून 2026 में यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में है और कई देशों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। फ्रांस सहित कई देशों में गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि गर्मी से राहत पाने के प्रयास में कई लोगों की जान तक चली गई है।
यूरोप में भीषण गर्मी, 42 डिग्री पहुंचा तापमान; 40 लोगों की डूबने से मौत, स्कूल बंद

यूरोप में रिकॉर्ड तापमान के बीच फ्रांस में 40 से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत हो गई है। ज्यादातार लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, नहरों और तालाबों में उतरे थे। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसमीय परिस्थितियों का परिणाम मान रहे हैं।

फ्रांस में गर्मी बनी जानलेवा

फ्रांस इस समय भीषण गर्मी की सबसे बड़ी मार झेल रहा है। देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और लोगों के लिए सामान्य जीवन मुश्किल होता जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार 18 जून के बाद से डूबने की घटनाएं बढ़ी है। ज्यादातर पीड़ित युवा थे, जो बिना सुरक्षा व्यवस्था वाले जलस्रोतों में तैरने चले गए थे। सरकार ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए सतर्कता बढ़ा दी है।

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रिकॉर्ड तापमान ने तोड़े पुराने आंकड़े

रिपोर्ट्स के मुताबिक  फ्रांस के कई शहरों में जून के तापमान के पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र के एक शहर में पारा 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। कई विभागों में हाई लेवल की चेतावनी जारी की गई है। बढ़ती गर्मी का असर पर्यटन स्थलों, स्कूलों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

कई यूरोपीय देश झेल रहे गर्मी की मार

फ्रांस के अलावा ब्रिटेन, स्पेन, इटली और स्विट्जरलैंड भी तेज गर्मी का सामना कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में सामान्य से कहीं अधिक तापमान दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप वैश्विक औसत की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। इसी कारण लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसका प्रभाव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ रहा है।

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ओमेगा ब्लॉक ने बढ़ाई मुश्किलें

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस असामान्य गर्मी के पीछे ओमेगा ब्लॉक नामक मौसमीय प्रणाली जिम्मेदार है। इसके कारण गर्म हवा का क्षेत्र लंबे समय तक यूरोप के ऊपर स्थिर बना हुआ है। जिससे ठंडी हवाएं नहीं आ पा रही है। उच्च दबाव वाले क्षेत्र बारिश को भी प्रभावित कर रहे हैं। परिणामस्वरूप कई इलाकों में गर्मी की तीव्रता और बढ़ गई है।

जलवायु परिवर्तन पर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने चरम मौसमीय घटनाओं को अधिक गंभीर बना दिया है। आर्कटिक और आल्प्स क्षेत्रों में बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे तापमान लगातार बढ़ रहा है। समुद्री तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी गर्मी और अधिक खतरनाक रूप ले सकती है। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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