इंजीनियर्स डे विशेष: अब दिव्यांग व्हील चेयर के साथ चढ़ सकेंगे सीढ़ियां, भोपाल के रियाज की डिजाइन को मिला पेटेंट
(साकिब खान) भोपाल। शारीरिक रूप से दिव्यांगों के जीवन को आसान बनाने और उन्हें चलने-फिरने में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक ऐसी व्हील चेयर भोपाल के इंजीनियर रियाज रफीक (39) ने डिजाइन की है, जिससे दिव्यांग सीढ़ियों पर भी चढ़ सकेंगे। रियाज ने बताया कि इस अविष्कार को पेटेंट मिलने में करीब 12 साल से अधिक का समय लग गया। उन्होंने बताया कि इस व्हीलचेयर से सामान्य सतहों पर जा सकते हैं और बिना किसी सहायता के स्वचालित रूप से सीढ़ियां भी चढ़ सकते हैं। इस व्हील्चेयर में एक खास तरह का मेकेनिज्म का आविष्कार किया गया है जिसकी वजह से उपयोगकर्ता को व्हीलचेयर को चलाने के लिए कंट्रोल पैनल से सिर्फ दिशा चुनना होगा और यह सीढ़ी चढ़ने के लिये पूरी तरह से स्वचालित होगी इसके अलावा यह अलग अलग आकार के सीढ़ियों पर भी असानी से चलेगी। यह मेकैनिकल मेकेनिज्म के क्षेत्र में प्रदेश का पहला आविष्कारक भी है।
2002 में की थी डिजाइन की शुरुआत
इस डिजाइन पर रियाज रफीक ने साल 2002 में काम शुरु किया। 2007 में डिजाइन कंपलीट करने के बाद इसको पेटेंट के लिए अप्लाई किया। कई हेयरिंग्स के बाद इस डिजाइन को 2019 में पेटेंट मिला। उन्होने बताया कि यह वर्ल्ड में पहला डिजाइन है जो पैटेंट हुआ है। इस डिजाइन पर अभी भी कई देश काम कर रहे हैं। बता दें कि पेटेंट एक ऐसा कानूनी अधिकार है जो किसी व्यक्ति या संस्था को नई तकनीकी, उत्पाद डिजाइन के लिए प्रदान किया जाता है ताकि कोई उनकी नकल नहीं तैयार कर सके।ऐसे आया आइडिया
एक घटना साझा करते हुए रियाज ने बताया 2000 की बात है जब क्रिकेट खेलते समय दुर्घटनावश गिरने से उनके बाएं हाथ की दोनों हड्डियां टूट गई थीं। लगभग ढाई महीने तक उनके हाथ पर प्लास्टर बंधे रहे। यह वह क्षण था जब उन्होंने महसूस किया कि एक दिव्यांग व्यक्ति कैसे जीवन जीता है, क्योंकि वह दुसरों पर निर्भर है। वर्ष 2002 में भोपाल रेलवे स्टेशन पर जब एक पैर से अपाहिज व्यक्ति को घसीटते हुए बहुत ही परेशानी से स्टेशन की सीढीयां चढ़ते देखा तो मैं बेचैन हो गया। तब मुझे लगा कि मुझे ऐसा कोई डिजाइन तैयार करना चाहिए जो कि दिव्यांगों को सीढ़ियां चढ़ने में हेल्प करे।












