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जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने पेश की मिसाल :14 साल की राधिका की फटी 'गठान' का सफल ऑपरेशन, आधी रात को जोखिम उठाकर बचाई जान

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. सतीश राजपूत ने जोखिम उठाते हुए रात करीब 1 बजे ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान काफी अधिक ब्लीडिंग हुई, लेकिन डॉक्टरों की सूझबूझ से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
14 साल की राधिका की फटी 'गठान' का सफल ऑपरेशन, आधी रात को जोखिम उठाकर बचाई जान

गुना | गुना जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित निर्णय क्षमता से एक 14 वर्षीय बालिका को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है। ग्राम  मंगरोडा (तहसील बमोरी) निवासी राधिका, पिता ब्रजेश प्रजापति को बुधवार रात पेट में असहनीय दर्द और लगातार उल्टी की शिकायत के बाद जिला अस्पताल लाया गया था। निजी अस्पताल में भारी खर्च के कारण परिजन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहाँ डॉक्टरों ने देवदूत बनकर उसकी जान बचाई।

पेट के अंदर फट गई थी गठान 

सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर के निर्देश पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश राजपूत ने जब राधिका का परीक्षण किया, तो स्थिति अत्यंत नाजुक पाई गई। राधिका के पेट के अंदर मौजूद एक बड़ी गठान फट चुकी थी, जिससे पेट के भीतर रक्त का रिसाव (Internal Bleeding) शुरू हो गया था। बालिका का ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था और उसकी जान पर बन आई थी। ऐसी स्थिति में तत्काल ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प था।

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रात 1 बजे हुआ जोखिम भरा ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. सतीश राजपूत ने जोखिम उठाते हुए रात करीब 1 बजे ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान काफी अधिक ब्लीडिंग हुई, लेकिन डॉक्टरों की सूझबूझ से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। राधिका को एक यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। सफल ऑपरेशन के बाद अब राधिका खतरे से बाहर है और उसकी हालत में सुधार है। इस जीवन रक्षक टीम में डॉ. सतीश राजपूत के साथ डॉ. नितिन गुप्ता, डॉ. पूजा धाकड़, स्टाफ अलका, विधि, वार्डबॉय सुरेखा अहिरवार और गिरराज का विशेष सहयोग रहा।

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लड़की के पिता को सुनिए

डॉक्टर्स बोले- गंभीर स्थिति, दर्द कंट्रोल से बाहर होता है

डॉ. सतीश राजपूत ने आगे कहा कि एक बच्ची 14 साल की पेट शिकायत के बाद भर्ती की गई थी। उसकी स्थिति देखते हुए मेडिकल इमरजेंसी वॉर्ड में शिफ्ट करवाया गया था। जहां मेडिकल स्पोशलिस्ट ने उसे देखकर कहा कि यह डायनमिक प्रॉब्लम हो सकती है। सतीश राजपूत ने उस बच्ची को देखा उसके बाद एक प्राइवट रिपोर्ट थी जिसमें ओविरिएंट ट्यूमर का टॉर्शन आ रहा था ऐसी सिचुएशन काफी गंबीर होती है। क्योंकि उसे गठान थी दर्द काफी नियंत्रण से बाहर होता है। 

 

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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