गानों में फ्यूजन करो कंफ्यूजन नहीं, वरना कुछ याद नहीं रहता

राजस्थानी फोक सिंगर मामे खान ने आईएम भोपाल से खास बातचीत में संगीत और उसमें हो रहे प्रयोग पर की बात
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गानों में फ्यूजन करो कंफ्यूजन नहीं, वरना कुछ याद नहीं रहता

अनुज मीणा- भोपाल की जनता मुझे हमेशा से बहुत प्यार करती है, बहुत आशीर्वाद और दुआएं देती है। मेरे संगीत में परिवर्तन नहीं आया है। मेरा संगीत और रूट्स वही हैं। मैंने मेरे संगीत के आटे में सिर्फ नमक मिलाया है। आज का समय भाग रहा है तो उसी हिसाब से अपने संगीत में थोड़ा-सा मॉडर्न ट्विस्ट किया है, जो लोगों को काफी पसंद आ रहा है। यह कहना था, फेमस राजस्थानी फोक सिंगर मामे खान का।

जड़े जोड़ती हैं, तोड़ती नहीं

मामे खान ने कहा कि मैं हमेशा कहता रहा हूं, फ्यूजन करो, कंफ्यूजन मत करो। फ्यूजन का मतलब ये नहीं कि आप अपने रूट्स को छोड़ दें। आप आपके रूट्स को कायम रखो। आपकी जो जड़ें हैं वो आपको जोड़ती हैं, तोड़ती नहीं हैं। मेरा तो परफॉर्मेंस ही पुराने गाने हैं, मैं उन्हीं पर चलूंगा। जो पुराने गाने हैं उन्हें नए और ताजा करते हुए चलूंगा। सच कहूं तो बहुत ज्यादा प्रयोग मूल संगीत की आत्मा को खत्म करते हैं।

कई आवाजें याद नहीं रहतीं

फिल्मों में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी के बाद आशा भोंसले के गाने सुनने के बाद पहचानने में आते हैं। सोनू निगम, शंकर महादेवन आज के समय में भी ट्रेंड में चल रहे हैं। बहुत सारे लोग गाते हैं, उनके गाने कुछ समय चलते हैं इसके बाद समझ ही नहीं आते हैं। गानों में आवाज भी समझ नहीं आती कौन गा रहा है। कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो सुनने में आती हैं। उनका गाना आता है तो समझ आता कौन गा रहा है।

फोक और म्यूजिक का है आज का टाइम

मामे खान ने बताया कि लागी रे लगन... गाना मैंने पहली बार भोपाल में ही गाया था। लोगों को यह गाना आज भी काफी पसंद आता है। यह मेरे यूट्यूब चैनल पर है। ये ऑर्गेनिक एवं इंडिपेंडेंट म्यूजिक है। आज फोक और म्यूजिक का टाइम है। बस ये आप पर डिपेंड करता है कि आप इसे लोगों के सामने कैसे पेश करते हैं। कलाकार को सिर्फ कलाकार होना ही काफी नहीं है, उसे समय के साथ बदलना भी होता है।

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By People's Reporter
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