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अमेरिका में किसका ज्यादा दबदबा ?डेमोक्रेटिक या रिपब्लिकन पार्टी, जानिए सत्ता का पूरा गणित

अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के बीच आखिर कौन ज्यादा ताकतवर है? जानिए दोनों दलों का इतिहास, विचारधारा, वोट बैंक, चुनावी ताकत और क्यों 150 साल से अमेरिकी राजनीति इन्हीं दो पार्टियों के इर्द-गिर्द घूम रही है।
डेमोक्रेटिक या रिपब्लिकन पार्टी, जानिए सत्ता का पूरा गणित
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अमेरिका में जब भी चुनाव की बात होती है तो सबसे पहले दो नाम सामने आते हैं- डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी। राष्ट्रपति से लेकर सांसद और गवर्नर चुनने तक के ज्यादातर चुनावों में मुकाबला डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के बीच ही होता है। यही वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे प्रभावशाली लोकतंत्र की राजनीति पिछले करीब डेढ़ सौ साल से इन दोनों पार्टियों के इर्द-गिर्द घूम रही है। 

अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा कि आखिर अमेरिका में नई पार्टियों के लिए जगह क्यों नहीं बन पाती और डेमोक्रेटिक तथा रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा इतना मजबूत क्यों है। इसी के साथ यह चर्चा भी तेज हो गई कि मौजूदा समय में इन दोनों में से ज्यादा ताकतवर कौन है।

सबसे पहले समझिए दोनों पार्टियों का इतिहास

डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिका की सबसे पुरानी सक्रिय राजनीतिक पार्टी मानी जाती है। इसकी स्थापना 1828 में हुई थी। इस पार्टी की शुरुआती जड़ें थॉमस जेफरसन और जेम्स मैडिसन की डेमोक्रेटिक-रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ी थीं। बाद में एंड्र जैक्सन ने इसे मजबूत संगठन का रूप दिया। समय के साथ यह पार्टी सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की समर्थक बन गई। वहीं रिपब्लिकन पार्टी की शुरुआत 1854 में हुई। इसे उन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बनाया था जो दास प्रथा का विरोध कर रहे थे। 1860 में अब्राहम लिंकन इस पार्टी के पहले राष्ट्रपति बने। आज रिपब्लिकन पार्टी को पारंपरिक मूल्यों, सीमित सरकारी हस्तक्षेप, कम टैक्स और राष्ट्रवादी नीतियों की समर्थक माना जाता है।

आखिर दोनों पार्टियों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

डेमोक्रेटिक पार्टी आमतौर पर यह मानती है कि सरकार को समाज के कमजोर वर्गों की मदद के लिए ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च बढ़ाने का समर्थन इस पार्टी की पहचान माना जाता है। दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त बाजार की समर्थक मानी जाती है। यह मानती है कि सरकार का दखल कम होना चाहिए और लोगों तथा व्यवसायों को ज्यादा स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसी वैचारिक अंतर ने अमेरिकी राजनीति को दो बड़े खेमों में बांट रखा है।

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क्या सिर्फ इतिहास की वजह से मजबूत हैं ये पार्टियां?

सिर्फ पुराना इतिहास ही इन दोनों दलों की ताकत का कारण नहीं है। अमेरिका का चुनावी सिस्टम भी काफी हद तक दो-पार्टी व्यवस्था को मजबूत करता है। राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए देशभर में बड़ा संगठन, भारी फंडिंग, लाखों कार्यकर्ता और मजबूत चुनावी नेटवर्क चाहिए होता है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के पास यह सब पहले से मौजूद है। इसलिए नई पार्टियों के लिए उनके मुकाबले खड़ा होना बेहद मुश्किल हो जाता है। छोटी पार्टियों को चुनावी बैलेट में नाम शामिल कराने से लेकर प्रचार के लिए पैसा जुटाने तक कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि कई नई पार्टियां बनती हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पातीं।

फिर कौन ज्यादा ताकतवर है?

यह सवाल जितना आसान लगता है, जवाब उतना ही जटिल है। अमेरिका में किसी एक पार्टी को हमेशा सबसे ताकतवर नहीं कहा जा सकता। ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि राष्ट्रपति किस पार्टी का है, कांग्रेस के दोनों सदनों में किसका बहुमत है और जनता का समर्थन किसके साथ है। कई बार रिपब्लिकन पार्टी व्हाइट हाउस पर कब्जा कर लेती है, लेकिन कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी मजबूत रहती है। वहीं कई बार स्थिति इसके उलट भी हो जाती है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने हाल के वर्षों में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई है। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी भी शहरी क्षेत्रों, युवाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मजबूत समर्थन आधार बनाए हुए है।

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अमेरिका में तीसरी पार्टी क्यों नहीं बन पाती बड़ी ताकत?

अमेरिका में रिफॉर्म पार्टी, ग्रीन पार्टी, लिबर्टेरियन पार्टी और कई अन्य राजनीतिक दल मौजूद हैं। लेकिन इनमें से कोई भी डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी जैसी ताकत हासिल नहीं कर पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी मतदाता आमतौर पर उन्हीं दलों को चुनते हैं जिनके जीतने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में छोटी पार्टियों को वोट मिलना मुश्किल हो जाता है। 1992 में अरबपति कारोबारी रॉस पेरोट ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और उन्हें करीब 19 प्रतिशत वोट भी मिले थे। इसके बावजूद वह चुनाव नहीं जीत सके। यही उदाहरण बताता है कि अमेरिका में तीसरी ताकत के लिए रास्ता कितना कठिन है।

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अमेरिकी राजनीति में क्यों कायम है दो पार्टियों का वर्चस्व?

पिछले लगभग 150 वर्षों से अमेरिका में सत्ता कभी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास जाती है तो कभी रिपब्लिकन पार्टी के पास। दोनों दलों ने अपने-अपने मजबूत वोट बैंक, संगठन और राजनीतिक पहचान बनाई है। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट, जॉन एफ. कैनेडी और बराक ओबामा जैसे नेता डेमोक्रेटिक पार्टी से निकले, जबकि अब्राहम लिंकन, रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज बुश और डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के बड़े चेहरे रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिकी राजनीति में इन दोनों दलों का प्रभाव आज भी कायम है और फिलहाल कोई तीसरी पार्टी उनके वर्चस्व को चुनौती देती नजर नहीं आती।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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