कैंसर, इंसुलिन और रेबीज में मिलावट !दिल्ली में 6 करोड़ की नकली दवाएं जब्त

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में नकली दवाओं का ऐसा खतरनाक खेल सामने आया है, जिसने मरीजों की जिंदगी को सीधे खतरे में डाल दिया था। क्राइम ब्रांच ने राजधानी के मुखर्जी नगर इलाके में चल रही। अवैद फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए करीब 6 करोड़ रुपये की फर्जी और रीपैकेज की गई दवाएं जब्त की हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह के निशाने पर कैंसर, कैंसर, इंसुलिन, रेबीज और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं थीं। पुलिस के अनुसार आरोपी सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी जाने वाली दवाओं को अवैध तरीके से बाहर निकालते थे। इसके बाद दिल्ली में उनके पुराने लेबल हटाकर नए कमर्शियल पैकिंग में बाजार में सप्लाई की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जांच एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं।
मुखर्जी नगर में चल रही थी सीक्रेट फैक्ट्री
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि उत्तर दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक परिसर के अंदर बड़े स्तर पर दवाओं की रीपैकेजिंग और नकली लेबल लगाने का काम हो रहा है। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने इंद्र विकास कॉलोनी स्थित यूनिट पर छापा मारा। रेड के दौरान पुलिस को वहां भारी मात्रा में दवाएं, पैकिंग मशीनें, नकली स्टिकर, फर्जी लेबल और सरकारी सप्लाई वाली मेडिसिन बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि यहां दवाओं की पैकिंग बदलकर उन्हें बाजार में नई दवा की तरह बेचा जा रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह काम लंबे समय से बेहद सुनियोजित तरीके से चल रहा था और इसका नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर के साथ पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ था।
सरकारी अस्पतालों की दवाएं बाजार में बेच रहा था गिरोह
जांच में पता चला है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भेजी गई दवाएं हासिल करते थे। इन दवाओं पर साफ लिखा होता था - 'सरकारी आपूर्ति, बिक्री के लिए नहीं'। दिल्ली लाने के बाद इन दवाओं के पुराने लेबल हटाए जाते थे और उन पर नए कमर्शियल लेबल चिपकाकर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह पश्चिम बंगाल, असम और मणिपुर तक इस सप्लाई चेन को चला रहा था। अधिकारियों को शुरुआती जांच में हवाला के जरिए पैसों के लेनदेन के संकेत भी मिले हैं। अब आर्थिक एंगल से भी पूरे मामले की जांच की जा रही है।
कैंसर, रेबीज और इंसुलिन की बड़ी खेप जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं मिलीं, जिनका इस्तेमाल गंभीर बीमारियों के इलाज में होता है। अधिकारियों के मुताबिक 14 हजार से ज्यादा 'लेनवाटिनिब' कैप्सूल बरामद किए गए, जो कैंसर के मरीजों को दी जाती हैं। इसके अलावा 'हेपबेस्ट' की हजारों गोलियां, हेपेटाइटिस-बी और रेबीज के इंजेक्शन भी मिले। पुलिस को डायबिटीज मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले इंसुलिन कार्ट्रिज भी बड़ी संख्या में मिले हैं। रेड में सांप के जहर के इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन, ह्यूमन एल्ब्यूमिन की बोतलें और दर्द की दवाओं का बड़ा स्टॉक भी मिला। पुलिस का कहना है कि अगर ये नकली दवाएं बाजार में बिक जातीं, तो कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
चार आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड भी दबोचा गया
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कथित मास्टरमाइंड मनोज कुमार जैन शामिल है, जो मुखर्जी नगर से पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। इसके अलावा हरियाणा के पंचकूला निवासी राजू कुमार, प्रयागराज के विक्रम सिंह उर्फ सन्नी और वतन को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था। सूत्रों के अनुसार, दवाओं की सप्लाई और पैसों के लेनदेन में कई अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
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कई धाराओं में केस दर्ज, सप्लायरों की तलाश जारी
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। फिलहाल सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। जांच एजेंसियां अब उन सप्लायरों की पहचान करने में लगी हैं, जो इस नकली दवा नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि सरकारी अस्पतालों से दवाएं बाहर कैसे पहुंच रही थीं और इसमें किसी अंदरूनी कर्मचारी की भूमिका तो नहीं थी।












