
बोगोटा। कोलंबिया के दक्षिण-पश्चिम इलाके में हिंसा ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। यात्रियों से भरी एक बस में हुए भीषण धमाके ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। इस धमाके में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 38 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पिछले दो दिनों से लगातार हमलों की वजह से हालात पहले ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की चुनौती को और बढ़ा दिया है।
शनिवार को काउका प्रांत के काजिबियो इलाके में पैनअमेरिकन हाईवे पर एक चलती बस को निशाना बनाया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सड़क पर पहले से विस्फोटक डिवाइस लगाया गया था, जो बस के गुजरते ही फट गया। इस भीषण विस्फोट में करीब 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 38 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों में कुछ बच्चों के भी शामिल होने की बात सामने आई है और कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कोलंबियाई सशस्त्र बलों के कमांडर जनरल ह्यूगो लोपेज ने इस घटना को आतंकी हमला बताया है। उन्होंने इसके लिए पूर्व FARC विद्रोहियों से जुड़े ‘हाइमे मार्टिनेज’ गुट को जिम्मेदार ठहराया है। यह वही समूह है जिसने 2016 में सरकार के साथ हुए शांति समझौते को स्वीकार नहीं किया था। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को आतंकवादी, फासीवादी और ड्रग तस्कर बताया है।
यह हमला किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। पिछले 48 घंटों में इस क्षेत्र में 26 से ज्यादा हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें पुलिस ठिकानों पर हमले, गोलीबारी, ड्रोन से विस्फोटक गिराने की कोशिश और सैन्य ठिकानों के पास कार बम धमाके शामिल हैं। शुक्रवार को काली और पल्मिरा शहरों में भी विस्फोट हुए थे, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले के पीछे मोस्ट वांटेड अपराधी इवान मोर्डिस्को का नेटवर्क और ‘हाइमे मार्टिनेज’ गुट शामिल है। ये दोनों समूह पूर्व FARC के भटके हुए धड़े हैं, जो अब अलग-अलग इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हिंसा का सहारा ले रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य ड्रग तस्करी और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करना है।
काउका और वैले डेल काउका क्षेत्र लंबे समय से ड्रग तस्करी के प्रमुख केंद्र रहे हैं। यहां से समुद्री और नदी मार्गों के जरिए ड्रग्स को मध्य अमेरिका और यूरोप तक पहुंचाया जाता है। इन्हीं रास्तों पर कब्जे को लेकर अलग-अलग सशस्त्र गुटों के बीच संघर्ष चल रहा है। यही कारण है कि, आम नागरिक और सार्वजनिक ढांचे भी इन हमलों का शिकार बन रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। रक्षा मंत्री ने कहा है कि, इन हमलों के पीछे शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। विद्रोही नेता ‘मार्लोन’ को पकड़ने के लिए 10 लाख डॉलर से ज्यादा का इनाम घोषित किया गया है। साथ ही हमलावरों की जानकारी देने वालों के लिए भी अलग इनाम रखा गया है। सरकार अब बड़े स्तर पर सैन्य और खुफिया अभियान चलाने की योजना बना रही है।
स्थानीय गवर्नरों और अधिकारियों ने केंद्र सरकार से तुरंत अतिरिक्त सुरक्षा बल और खुफिया मदद की मांग की है। उनका कहना है कि, आम लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और मौजूदा हालात में त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।