इंदौर। खातीवाला टैंक क्षेत्र में अवैध निर्माण पर नोटिस देने गए नगर निगम कर्मचारी को बर्खास्त किए जाने और पार्षद पर गाली-गलौच के आरोपों का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। निगम के पूर्व भवन दरोगा यतींद्र यादव ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग कर दी। आवेदन सामने आते ही मामला फिर सुर्खियों में आ गया।
जानकारी के अनुसार 23 दिसंबर 2024 को नगर निगम जोन-12 के दरोगा यतींद्र यादव खातीवाला टैंक स्थित 34 एम नंबर मकान पर अवैध निर्माण को लेकर नोटिस तामील करने पहुंचे थे। यह मकान शब्बीर हुसैन का बताया जा रहा है। यादव का आरोप है कि सूचना मिलने पर क्षेत्रीय पार्षद कमलेश कालरा मौके पर पहुंच गए और उन्हें बिना नोटिस दिए वापस जाने के लिए कहा।
यादव के मुताबिक उन्होंने पार्षद को बताया कि वह भवन अधिकारी राहुल सूर्यवंशी के निर्देश पर कार्रवाई करने आए हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और उनके साथ गाली-गलौच करते हुए धमकाया गया। जब उन्होंने नोटिस चस्पा करने की कोशिश की तो वहां मौजूद लोगों ने ऐसा नहीं करने दिया।
निगमकर्मी का कहना है कि घटना के बाद जब वह वापस लौटे तो बाद में उन्हें नौकरी से बर्खास्त किए जाने की जानकारी मिली। साथ ही पार्षद द्वारा कथित रूप से दी गई गालियों का ऑडियो वायरल होने से वह और उनका परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
यादव ने आवेदन में लिखा है कि उनके पिता भी निगम में ईमानदारी से सेवा दे चुके हैं, लेकिन अब परिवार को समाज में ताने सुनने पड़ रहे हैं। माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों पर भी इसका मानसिक असर पड़ा है और सामाजिक रूप से अपमान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने खुद को मानसिक पीड़ा से ग्रसित बताते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है।
आवेदन में यादव ने यह भी उल्लेख किया कि पिछड़ा वर्ग से होने के कारण उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम है, इसलिए वे इच्छामृत्यु की अनुमति चाहते हैं ताकि उनके परिवार को आगे सामाजिक अपमान का सामना न करना पड़े।
बताया गया कि घटना 23 दिसंबर 2024 की है, जबकि यतींद्र यादव को 29 सितंबर 2025 को सेवा से बर्खास्त किया गया। तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसौनिया ने यह कार्रवाई की थी। निगम प्रशासन के अनुसार बर्खास्तगी का आधार सोशल मीडिया पर निगम के अधिकारियों के खिलाफ की गई एक पोस्ट को माना गया।
यादव का यह भी आरोप है कि दो दिन पहले जोन-12 की भवन अधिकारी आराधना शुक्ला का फोन आया था, जिसमें उनसे पार्षद के खिलाफ की गई शिकायत वापस लेने को कहा गया। इंकार करने पर अपशब्द कहे जाने का भी आरोप लगाया गया है।